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सत्यजीत रे: भारतीय सिनेमा के महानायक की जयंती

आज भारतीय सिनेमा के महान निर्देशक सत्यजीत रे की जयंती है। उनका जन्म 1921 में कोलकाता में हुआ था और उन्होंने अपने करियर में 36 फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी फिल्में, विशेषकर अप्पू ट्राइलॉजी, आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई हैं। सत्यजीत रे को उनके कार्यों के लिए कई पुरस्कार मिले, जिसमें ऑस्कर भी शामिल है। जानें उनके जीवन की कुछ खास बातें और उनके योगदान के बारे में।
 

सत्यजीत रे का जन्मदिन

आज भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के महान निर्देशक सत्यजीत रे की जयंती है। उनका जन्म 1921 में कोलकाता में हुआ था और उनका निधन 1992 में हुआ। कला के इस महानायक की रचनाएँ आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं। सत्यजीत के पिता एक प्रसिद्ध लेखक थे, और उन्होंने अपना बचपन कोलकाता में बिताया। उन्होंने प्रेसिडेंसी कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की और बाद में विश्व भारती विश्वविद्यालय में भी अध्ययन किया। इसके बाद, वे अपनी आगे की शिक्षा के लिए विदेश गए।


विज्ञापन क्षेत्र में करियर की शुरुआत

फिल्मों में कदम रखने से पहले, सत्यजीत रे ने एक ब्रिटिश विज्ञापन एजेंसी में काम किया। 1950 में लंदन में बिताए छह महीनों ने उनके मन में फिल्म निर्माण के प्रति रुचि जगाई। इस दौरान उन्होंने 'बाइसिकल थीफ' नामक फिल्म देखी, जिसने उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डाला। इसके बाद, 1955 में उन्होंने 'पाथेर पांचाली' नामक फिल्म बनाई, जिसने न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पहचान बनाई।


अप्पू ट्राइलॉजी की प्रसिद्धि

सत्यजीत रे ने अपने करियर में 36 फिल्मों का निर्देशन किया, जिनमें अप्पू ट्राइलॉजी की कहानियाँ आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई हैं। उनकी फिल्में भारतीय सिनेमा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती हैं। वे उन कुछ निर्देशकों में से हैं जिन्हें विश्व के प्रमुख फिल्म निर्माताओं द्वारा सराहा गया।


ऑस्कर से सम्मानित

सत्यजीत रे का निधन कई साल पहले हो चुका है, लेकिन उनका कार्य आज भी लोगों को उनकी उपस्थिति का अनुभव कराता है। उन्हें भारत रत्न और फ्रांस के ऑनर जैसे कई पुरस्कारों से नवाजा गया। विशेष बात यह है कि उन्हें अपने निधन से ठीक पहले ऑस्कर अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था।