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सड़क पर पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित स्थान सुनिश्चित करने का आदेश

उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि सभी सड़कों पर पैदल यात्रियों के लिए अतिक्रमण-मुक्त और चिह्नित स्थान सुनिश्चित किया जाए। न्यायालय ने यह भी कहा कि पैदल यात्रियों का अधिकार मौलिक है और इसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस निर्णय से पैदल यात्रियों की सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
 

उच्चतम न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्देश

नई दिल्ली, तीन अगस्त: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि सभी सड़कों पर पैदल यात्रियों के लिए उचित रूप से चिह्नित और अतिक्रमण-मुक्त स्थान उपलब्ध कराया जाए। न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज से कहा कि उन्हें संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करना चाहिए कि पैदल यात्रियों के लिए निर्धारित स्थान पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न हो और इसे मोटर वाहनों के मार्ग से स्पष्ट रूप से अलग रखा जाए। पीठ ने कहा, “बिना किसी बड़े निवेश या निर्माण कार्य के भी यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि पैदल यात्रियों के लिए स्थान का स्पष्ट सीमांकन हो।


जहां भी सड़क है, वहां पैदल यात्रियों के लिए अलग स्थान होना चाहिए। इसे रस्सी या किसी अन्य साधन से चिह्नित किया जाना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वहां कोई अतिक्रमण न हो।” पीठ ने अधिकारियों को निर्देश देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया और इस बात पर जोर दिया कि पैदल यात्रियों को यह विश्वास होना चाहिए कि यह स्थान उनके लिए सुरक्षित है और वे बिना किसी चलते वाहन के खतरे के स्वतंत्र रूप से चल सकते हैं। शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद की तारीख निर्धारित की है।


उच्चतम न्यायालय ने 19 जून को एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा था कि सीमांकित फुटपाथ पर चलने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। अदालत ने यह भी कहा था कि सीमांकित मार्गों पर पैदल यात्रियों के अधिकार को प्राथमिकता दी जाएगी, जो अनुच्छेद 19 (1) (घ) के तहत गारंटीकृत आवागमन के अधिकार और अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) सहित अन्य मौलिक अधिकारों का हिस्सा है।