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सज्जाद गनी लोन की नजरबंदी पर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस का कड़ा विरोध

सज्जाद गनी लोन, जो पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष हैं, को उनके पिता की 24वीं पुण्यतिथि पर नजरबंद किया गया है। इस कदम की पार्टी ने कड़ी निंदा की है और इसे अलोकतांत्रिक बताया है। अब्दुल गनी लोन की हत्या 2002 में हुई थी, और इस मामले ने कश्मीर घाटी में राजनीतिक हलचल को बढ़ा दिया है। विपक्षी दल इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन मानते हैं। जानें इस मामले की पूरी जानकारी।
 

सज्जाद गनी लोन की नजरबंदी

पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन को उनके पिता की 24वीं पुण्यतिथि पर नजरबंद किया गया है। पार्टी ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि यह अलोकतांत्रिक है।


पार्टी ने बयान में कहा, "इस तरह के कदम जनभावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करते हैं।"


घटना का विवरण

सज्जाद गनी लोन के पिता, अब्दुल गनी लोन, की हत्या 21 मई 2002 को आतंकवादियों द्वारा की गई थी। वह उस समय हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की एक रैली से लौट रहे थे।


यह रैली कश्मीर के प्रमुख नेता मीरवाइज मौलवी मोहम्मद फारूक को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित की गई थी। दिलचस्प बात यह है कि मीरवाइज मौलवी मोहम्मद फारूक की हत्या भी 21 मई को, 12 साल पहले की गई थी।


पीपुल्स कॉन्फ्रेंस का विरोध

सज्जाद गनी लोन की नजरबंदी से नाराज पीपुल्स कॉन्फ्रेंस ने सरकार के इस निर्णय पर कड़ा ऐतराज जताया है। पार्टी ने कहा, "यह कार्रवाई पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है।"


पार्टी ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि एक बेटे को उसके दिवंगत पिता की बरसी पर इस तरह नजरबंद करना लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करता है।


राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

कश्मीर घाटी में इस नजरबंदी को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। विपक्षी दल और क्षेत्रीय पार्टियाँ इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन मान रहे हैं।


समाचार लिखे जाने तक, स्थानीय प्रशासन या पुलिस ने इस नजरबंदी के पीछे सुरक्षा कारणों का कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया है।