सचिन पायलट ने राजस्थान सरकार की शिक्षा नीतियों पर उठाए सवाल
राजस्थान सरकार की आलोचना
शनिवार को AICC के महासचिव सचिन पायलट ने राजस्थान सरकार की नीतियों पर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने राज्य के विश्वविद्यालयों में मराठी भाषा अध्ययन केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कदम शिक्षा के महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला है। जयपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए, पायलट ने शिक्षा मंत्री की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए।
पायलट ने कहा कि राजस्थान में शिक्षा मंत्री का रवैया चिंताजनक है। वे तबादलों और पदस्थापनों में प्रतिशोध की भावना से कार्य कर रहे हैं, जिससे लोगों को परेशान किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार शिक्षा और बुनियादी ढांचे में सुधार के बजाय अन्य मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जो कि शिक्षा के लिए हानिकारक है। पायलट ने सरकार की विफलताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और कानून व्यवस्था में सरकार पूरी तरह असफल रही है।
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे के निर्देश पर राजस्थान के विश्वविद्यालयों में 'शास्त्रीय मराठी भाषा अध्ययन केंद्र' की स्थापना की प्रक्रिया शुरू की गई है। राज्यपाल सचिवालय ने सभी विश्वविद्यालयों को इस संबंध में पत्र भेजा है।
महाराष्ट्र में मराठी भाषा का महत्व
जून में, महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री दादा भूसे ने घोषणा की थी कि राज्य के सभी स्कूलों में कक्षा 1 से 10 तक मराठी को अनिवार्य भाषा बनाया जाएगा। उन्होंने निर्देश का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी और कहा कि सरकार मराठी और छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।