सकट चौथ व्रत: पूजा के नियम और सावधानियाँ
सकट चौथ व्रत के नियम
सकट चौथ व्रत के पूजा नियमImage Credit source: AI
सकट चौथ व्रत के नियम: भारतीय परंपरा में सकट चौथ को एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है, जो संकटों से मुक्ति, संतान सुख और पारिवारिक शांति के लिए मनाया जाता है। यह व्रत माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को होता है, जो 2026 में 6 जनवरी को आएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूजा और व्रत को पूरी श्रद्धा और विधि के साथ करना आवश्यक है। छोटी-सी भी चूक जीवन में अप्रत्याशित परिणाम ला सकती है, इसलिए भक्तों को इसे ध्यानपूर्वक और अनुशासन के साथ करना चाहिए।
पूजा में गलतियों से बचें!
सकट चौथ व्रत में गणेशजी और चंद्रमा की विशेष पूजा होती है। पूजा स्थल की स्वच्छता, दीप जलाना, जल, दूर्वा और पुष्प अर्पित करना इस व्रत का अभिन्न हिस्सा है। शास्त्रों में कहा गया है कि यदि पूजा में ध्यान नहीं दिया गया या मन भटकता रहा, तो व्रत का फल कम हो सकता है। कई भक्त पूजा के समय मोबाइल या अन्य व्याकुलताओं में लगे रहते हैं, जिससे मन की एकाग्रता भंग होती है और व्रत के आध्यात्मिक लाभ प्रभावित होते हैं।
अर्घ्य और मंत्र का सही उच्चारण
सकट चौथ पर चंद्र दर्शन और गणेशजी को अर्घ्य देना व्रत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस समय मंत्र "ॐ सोमाय नमः" या "ॐ चंद्राय नमः" का उच्चारण करना आवश्यक है। यदि मंत्र का उच्चारण गलत या लापरवाही से किया जाए, तो चंद्रमा और गणेशजी की कृपा नहीं मिलती। पुराणों में कहा गया है कि मंत्र का सही उच्चारण व्रत के आध्यात्मिक प्रभाव को बढ़ाता है। इसलिए व्रती को ध्यान और भक्ति से मंत्र का जाप करना चाहिए।
नियमों और संयम का महत्व
सकट चौथ व्रत में सात्विक आहार का पालन करना आवश्यक है। इस दिन फलाहार करने वाले भक्त फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा और तिल-गुड़ का सेवन कर सकते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि अनियमित या तामसिक भोजन लेने से व्रत का आध्यात्मिक प्रभाव कम हो जाता है। संयम और शुद्ध आहार का पालन न करने पर मानसिक अशांति और पारिवारिक तनाव बढ़ सकते हैं। इसलिए श्रद्धालुओं को पूरे दिन सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए।
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