संसद के मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक का आयोजन
सर्वदलीय बैठक का महत्व
रविवार को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले, सरकार ने एक सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया है। इस बैठक में विधायी एजेंडे और संसद की आगामी गतिविधियों पर चर्चा की जाएगी। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के सदन के नेताओं को आमंत्रित किया गया है, ताकि सत्र के दौरान सदन का कार्य सुचारू रूप से चल सके।
विपक्ष के मुद्दे
सूत्रों के अनुसार, विपक्ष जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के मुद्दे को उठाने की योजना बना रहा है। हाल ही में, स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर से हटाया गया था। विपक्षी दल इस कार्रवाई पर सरकार से स्पष्टीकरण मांग सकते हैं।
अयोध्या मंदिर का मुद्दा
बैठक में अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के दुरुपयोग का मुद्दा भी उठ सकता है। समाजवादी पार्टी ने पहले ही इस मामले को संसद में उठाने का निर्णय लिया है, जिससे विपक्ष की ओर से तीखी प्रतिक्रिया की संभावना है।
नए विधेयकों का प्रस्ताव
सरकार इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने की योजना बना रही है। लोकसभा सचिवालय के बुलेटिन के अनुसार, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पेश किया जाएगा, जो राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के अपमान को दंडनीय अपराध बनाएगा।
अन्य विधेयक
इसके अतिरिक्त, जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश किया जाएगा, जिसका उद्देश्य पंजीकरण के नियमों को सख्त करना है। सरकार आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 भी लाएगी, जो विदेशी निवेशकों को कर छूट देने वाले अध्यादेश का स्थान लेगा।
सत्र की अवधि
यह मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने की संभावना है। इस पारंपरिक बैठक में सरकार सभी दलों से सदन की गरिमा बनाए रखने और कार्यवाही को बिना किसी बाधा के संचालित करने में सहयोग का अनुरोध करती है।