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संसद की संयुक्त समिति का कार्यकाल बढ़ा, 130वें संविधान संशोधन पर चर्चा जारी

संसद की संयुक्त समिति ने 130वें संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा का कार्यकाल बढ़ा दिया है। यह निर्णय प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के खिलाफ गंभीर आरोपों के मामलों में 30 दिनों तक हिरासत में रहने की स्थिति में पद से हटाने के प्रावधान को लेकर है। समिति की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने सदन में यह प्रस्ताव रखा, जिसे स्वीकार कर लिया गया। जानें इस विधेयक के पीछे की कहानी और आगे की योजनाएं।
 

संविधान संशोधन विधेयक पर विचार

संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के खिलाफ गंभीर आरोपों के मामलों में 30 दिनों तक हिरासत में रहने की स्थिति में उन्हें पद से हटाने के लिए प्रस्तावित 130वें संविधान संशोधन विधेयक पर विचार करने का कार्यकाल शुक्रवार को शीतकालीन सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक बढ़ा दिया है। भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी, जो समिति की अध्यक्ष हैं, ने सदन में यह प्रस्ताव रखा, जिसे ध्वनिमत से स्वीकार कर लिया गया।


इससे पहले, समिति ने 17 जुलाई को अपनी मसौदा रिपोर्ट को अंगीकार करने की प्रक्रिया को स्थगित करने का निर्णय लिया था। अपराजिता सारंगी ने बताया कि सदस्यों ने इस विषय पर और चर्चा की आवश्यकता महसूस की, जिसके चलते यह निर्णय लिया गया। संयुक्त समिति का गठन 12 नवंबर 2025 को किया गया था।


गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले वर्ष मानसून सत्र के अंत में विपक्ष के विरोध के बीच इन विधेयकों को सदन में पेश किया था। इसके बाद सदन ने इन तीनों विधेयकों को संयुक्त समिति को भेजने का निर्णय लिया था।