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संजय राउत ने सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर उठाए सवाल

शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की 26 दिन की भूख हड़ताल समाप्त करने के तरीके पर चिंता जताई है। उन्होंने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह हड़ताल जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की उपस्थिति में समाप्त होनी चाहिए थी। राउत ने आंदोलन के प्रभाव और सरकार के दो मंत्रियों की उपस्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने भविष्य के बड़े विरोध प्रदर्शनों की योजना का ऐलान किया है, जिसमें कई प्रमुख नेता शामिल होंगे।
 

संजय राउत की चिंता

शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने शुक्रवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा 26 दिन की भूख हड़ताल समाप्त करने के तरीके पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह हड़ताल जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों और आम जनता की उपस्थिति में समाप्त होनी चाहिए थी। राउत ने वांगचुक के विरोध प्रदर्शन खत्म करने के निर्णय का स्वागत किया, लेकिन भूख हड़ताल समाप्त करने में केंद्रीय मंत्रियों की भूमिका पर सवाल उठाए।


आंदोलन का प्रभाव

राउत ने बताया कि इस 26 दिन के आंदोलन ने देश के युवाओं और आम नागरिकों को सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह भी कहा कि जिस सरकार के खिलाफ यह विरोध प्रदर्शन हुआ, उसी सरकार के दो मंत्री भूख हड़ताल खत्म होने के समय वहां मौजूद थे, जिससे कई सवाल उठते हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि सरकार ने वांगचुक को क्या आश्वासन दिया था और इस जानकारी को सार्वजनिक करने की आवश्यकता पर जोर दिया।


सरकार की भूमिका पर सवाल

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस विरोध प्रदर्शन की मुख्य मांगों में से एक था। राउत ने सवाल उठाया कि यदि यह मांग पूरी नहीं हुई, तो भूख हड़ताल खत्म करने का क्या कारण था? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार धर्मेंद्र प्रधान को बचाने की कोशिश कर रही थी और पुलिस कार्रवाई के दौरान एक छात्र की मौत और कई अन्य लोगों के घायल होने पर चिंता व्यक्त की।


भूख हड़ताल का समापन

राउत ने सुझाव दिया कि यदि वांगचुक को अपनी भूख हड़ताल समाप्त करनी थी, तो बेहतर होता कि वे घायल छात्रों या साथी प्रदर्शनकारियों के हाथों जूस पीकर ऐसा करते, जिससे आंदोलन की भावना का सम्मान होता।


भविष्य की योजनाएँ

उन्होंने मुंबई में बड़े विरोध प्रदर्शनों की योजना का ऐलान किया, जिसमें आदित्य ठाकरे और कई संगठनों द्वारा आयोजित राष्ट्रगान आंदोलन और रविवार को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के नेतृत्व में होने वाला मार्च शामिल है। राउत ने मुख्यमंत्री की आलोचना की, क्योंकि वे अब बातचीत की वकालत कर रहे हैं, जबकि पहले उन्होंने विपक्ष की कई बार की गई मांगों को नजरअंदाज किया था।


आंदोलन का महत्व

उन्होंने सरकार पर जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शन को दबाने और उसे बदनाम करने की कोशिश करने का आरोप लगाया और वांगचुक के साथ किए गए बर्ताव को अमानवीय बताया। राउत ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति के बारे में नहीं था, बल्कि देश की राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ था। सरकार आंदोलन खत्म करने का श्रेय लेना चाहती थी, जबकि यह आंदोलन लोगों का था।