श्वेत कुष्ठ के उपचार के लिए सप्त तेल का प्रयोग
दादा मदन लाल जी द्वारा विकसित सप्त तेल का प्रयोग श्वेत कुष्ठ के उपचार में अत्यधिक प्रभावी साबित हो रहा है। यह प्रयोग पिछले तीन-चार दशकों से निराश रोगियों के लिए उपयोग किया जा रहा है। जानें इस तेल के उपयोग की विधि और आवश्यक सामग्री, जो इस रोग से ग्रसित लोगों के लिए लाभकारी हो सकती है।
May 8, 2026, 06:48 IST
सप्त तेल का उपयोग और लाभ
दादा मदन लाल जी द्वारा प्रस्तुत एक अनुभूत प्रयोग, जो पिछले तीस-चालीस वर्षों से निराश रोगियों के उपचार में उपयोग किया जा रहा है। उनका मानना है कि यदि श्वेत कुष्ठ पुराना हो गया है, तो यह प्रयोग अत्यंत लाभकारी हो सकता है।
आवश्यक सामग्री:
- बावची तेल 10 मिली
- चाल मोगरा तेल 10 मिली
- लौंग तेल 10 मिली
- दालचीनी तेल 10 मिली
- तारपीन तेल 10 मिली
- श्वेत मिर्च का तेल 20 मिली
- नीम तेल 40 मिली
सप्त तेल तैयार करने की विधि:
- इन सभी तेलों को मिलाकर सुबह और शाम मालिश करें। चाहे श्वेत कुष्ठ कितना भी पुराना क्यों न हो, यह तेल का योग उसे ठीक कर सकता है। हालांकि, इस प्रक्रिया में चार से सात महीने का समय लग सकता है, इसलिए धैर्य बनाए रखें। यदि कोई समस्या उत्पन्न होती है, तो इसमें 50 मिली नारियल तेल मिलाया जा सकता है। इससे तेल की शक्ति कम हो जाएगी, लेकिन चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
- स्रोत: स्वदेशी चिकित्सा के चमत्कार, दादा मदन लाल जी का गुरु प्रदत्त अनुभूत प्रयोग।