शेयर बाजार में बकरीद की छुट्टी: जानें कब बंद रहेगा बाजार
बकरीद के अवकाश की पुष्टि
इस सप्ताह शेयर बाजार में निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण घटनाएं होने वाली हैं। यदि आप नियमित रूप से बाजार खुलने का इंतजार करते हैं और अपनी ट्रेडिंग रणनीतियों को तैयार करते हैं, तो आपके लिए एक महत्वपूर्ण सूचना है। दरअसल, बकरीद (ईद-उल-अजहा) के अवकाश को लेकर जो असमंजस था, वह अब समाप्त हो गया है। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने एक आधिकारिक नोटिस जारी कर इस स्थिति को स्पष्ट कर दिया है। इसके अनुसार, 28 मई 2026 को गजेटेड हॉलिडे घोषित किया गया है।
शेयर बाजार में ट्रेडिंग पर लगेगा ब्रेक
नई तारीख की घोषणा के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि बकरीद के अवसर पर 28 मई 2026 को भारतीय शेयर बाजार में कोई गतिविधि नहीं होगी। इस दिन NSE और BSE दोनों प्रमुख एक्सचेंज पूरी तरह से बंद रहेंगे। इसका अर्थ है कि इक्विटी, डेरिवेटिव्स या किसी अन्य सेगमेंट में ट्रेडिंग नहीं की जा सकेगी। निवेशकों को अपनी खरीदारी या बिक्री की योजनाएं इस छुट्टी को ध्यान में रखते हुए बनानी होंगी।
मई में छुट्टियों की भरमार
बाजार के दृष्टिकोण से, मई का महीना निवेशकों के लिए छुट्टियों का महीना साबित हो रहा है। इस महीने की शुरुआत 1 मई के अवकाश से हुई थी, जब बाजार पूरी तरह बंद रहा। इसके बाद शनिवार और रविवार की साप्ताहिक छुट्टियों ने ट्रेडिंग के दिनों की संख्या को और कम कर दिया। आंकड़ों के अनुसार, 3, 10, 17, 24 और 31 मई को रविवार था। वहीं, 2, 9, 16, 23 और 30 मई को शनिवार के कारण बाजार में कोई कामकाज नहीं हुआ। यदि हम इन सभी साप्ताहिक अवकाशों और गजेटेड छुट्टियों को जोड़ें, तो पूरे मई महीने में कुल 11 दिन ऐसे रहे जब शेयर बाजार में कोई कारोबारी गतिविधि नहीं हुई।
विदेशी बाजारों की गतिविधियों पर नजर
बकरीद की छुट्टी के कारण निवेशकों को एक और लंबा ब्रेक मिलने वाला है। 28 मई को बाजार बंद रहने के बाद, 30 मई को शनिवार और 31 मई को रविवार की साप्ताहिक छुट्टी होगी। इन दिनों घरेलू बाजार में कोई हलचल नहीं होगी। हालांकि, जब भारतीय शेयर बाजार बंद रहेगा, तब अमेरिका, यूरोप और एशियाई देशों के प्रमुख बाजारों में सामान्य रूप से ट्रेडिंग जारी रहेगी। ऐसे में जब भारतीय बाजार अपने अगले कारोबारी सत्र में खुलेगा, तो उस पर अंतरराष्ट्रीय बाजारों के रुझान, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, डॉलर की स्थिति और अन्य वैश्विक आर्थिक आंकड़ों का प्रभाव देखने को मिलेगा।