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शिवसेना सांसद ने महाराष्ट्र सरकार की योजनाओं पर उठाए सवाल

शिवसेना (UBT) के सांसद अरविंद सावंत ने महाराष्ट्र सरकार की 'माझी लड़की बहिन योजना' से 90 लाख लाभार्थियों को हटाने के निर्णय की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे संविधान का उल्लंघन बताते हुए सवाल उठाए हैं कि सरकार इस पर क्या कदम उठाएगी। सावंत ने कहा कि यह योजना महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करती है, और इसके तहत 21 से 65 वर्ष की आयु की महिलाओं को 1,500 रुपये दिए जाते हैं। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया।
 

महाराष्ट्र सरकार की आलोचना

शिवसेना (UBT) के सांसद अरविंद सावंत ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार की नीतियों पर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने 'माझी लड़की बहिन योजना' से 90 लाख लाभार्थियों को हटाने के निर्णय को "संविधान का गंभीर उल्लंघन" करार दिया और सरकारी फंड के प्रबंधन पर सवाल उठाए। पत्रकारों से बातचीत करते हुए सावंत ने कहा कि जिन महिलाओं के नाम इस योजना से हटाए गए, उनमें से कई ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में सत्ताधारी गठबंधन का समर्थन किया था।


महिलाओं के नाम हटाने का मुद्दा

सावंत ने कहा कि इस योजना से लाखों महिलाओं के नाम हटा दिए गए हैं। ये वही महिलाएं थीं जिन्होंने मौजूदा सरकार को सत्ता में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने यह भी बताया कि केवल महिलाओं ने ही वोट नहीं दिया, बल्कि उनके परिवारों ने भी समर्थन किया। अब सरकार को इस पर क्या कदम उठाना है? उन्होंने कहा कि यह जनता का पैसा है और इस तरह का हटाना संवैधानिक नियमों का उल्लंघन है।


संविधान का उल्लंघन

सावंत ने आगे कहा कि यह संविधान का गंभीर उल्लंघन है, और इसलिए वह इस सरकार के कार्यों पर गंभीर सवाल उठाना चाहते हैं। विधानसभा का सत्र समाप्त हो चुका है, लेकिन CAG की रिपोर्ट कई महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर इशारा करती है। उन्होंने कहा कि राज्य पर कर्ज का बोझ बहुत अधिक है, जो राज्य के राजस्व के 100 प्रतिशत से भी अधिक हो सकता है।


माझी लड़की बहिन योजना का उद्देश्य

महिला एवं बाल विकास विभाग और महाराष्ट्र सरकार द्वारा शुरू की गई 'माझी लड़की बहिन योजना' का उद्देश्य राज्य भर की योग्य महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत, 21 से 65 वर्ष की आयु की महिलाओं को सीधे उनके बैंक खातों में 1,500 रुपये दिए जाते हैं। इसका मुख्य लक्ष्य महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण में सुधार करना और परिवारों में निर्णय लेने की उनकी भूमिका को बढ़ाना है।