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शिमला में गैस संकट से पर्यटन उद्योग पर संकट, होटल बुकिंग रद्द

शिमला में गर्मियों की छुट्टियों की शुरुआत के साथ गैस संकट ने पर्यटन उद्योग को गंभीर संकट में डाल दिया है। कमर्शियल LPG सिलेंडरों की कमी के कारण होटल और रेस्टोरेंट्स में खाना पकाने में कठिनाई हो रही है, जिससे एडवांस बुकिंग रद्द हो रही हैं। पर्यटकों को केवल साधारण भोजन परोसा जा रहा है, और कई छोटे ढाबे बंद हो गए हैं। इस स्थिति ने पर्यटन कारोबार पर नकारात्मक प्रभाव डाला है, और सरकार से आपूर्ति बहाल करने की गुहार लगाई जा रही है।
 

शिमला में गैस की कमी से पर्यटन पर असर


शिमला: गर्मियों की छुट्टियों की शुरुआत के साथ, 'पहाड़ों की रानी' शिमला पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार थी, लेकिन अचानक एक गंभीर संकट ने दस्तक दे दी है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी के कारण पर्यटन उद्योग में हड़कंप मच गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि शहर के प्रमुख होटलों और रेस्टोरेंट्स में चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं। होटल संचालक अब एडवांस बुकिंग रद्द कर पर्यटकों को पैसे लौटाने के लिए मजबूर हो रहे हैं, जबकि पीक टूरिस्ट सीजन कुछ ही दिनों में शुरू होने वाला है।

मेन्यू में बदलाव: लजीज व्यंजन गायब
गैस की कमी ने होटलों के किचन में समस्याएँ खड़ी कर दी हैं। गैस की बचत के लिए, अधिकांश रेस्टोरेंट्स ने अपने मेन्यू को सीमित कर दिया है। अब पर्यटकों को तंदूरी रोटी, चाइनीज फूड या तले हुए व्यंजनों के बजाय केवल साधारण दाल-चावल और सब्जी-रोटी परोसी जा रही है। शिमला के मॉल रोड, मिडिल बाजार और लक्कड़ बाजार में स्थिति और भी खराब है, जहां कई छोटे ढाबे बंद हो गए हैं। यहां तक कि आईजीएमसी अस्पताल की कैंटीन भी इस संकट से प्रभावित हुई है। पर्यटन निगम के होटल 'होलीडे होम' में अब गैस के बजाय लकड़ियों पर खाना पकाया जा रहा है।

एडवांस बुकिंग रद्द, लाखों का रिफंड
होटल व्यवसायियों का कहना है कि जहां रोजाना 8 से 10 सिलेंडरों की आवश्यकता होती थी, वहीं अब मुश्किल से 2 या 3 सिलेंडर मिल पा रहे हैं। होटल लैंडमार्क के संचालक ने बताया कि गैस की कमी के कारण पिछले 15 दिनों में उन्हें लाखों रुपये का रिफंड करना पड़ा है। शादियों और पार्टियों की बुकिंग भी रद्द हो रही हैं। ट्रैवल एजेंट्स के पास देशभर से फोन आ रहे हैं, जिसमें पर्यटक सबसे पहले यही पूछते हैं कि क्या शिमला आने पर उन्हें खाना मिलेगा या नहीं?

मेन्यू से चाइनीज व्यंजन गायब
कई होटलों ने नई बुकिंग लेना भी बंद कर दिया है, जिससे पर्यटन कारोबार पर बड़ा असर पड़ रहा है। गैस की बचत के लिए होटलों ने अपने मेन्यू में बड़े बदलाव किए हैं। अब ज्यादातर जगहों पर केवल दाल, रोटी, सब्जी और चावल ही परोसे जा रहे हैं। तली हुई चीजें और चाइनीज फूड को मेन्यू से हटा दिया गया है। कुछ होटलों में चाय भी इंडक्शन चूल्हों पर बनाई जा रही है।

अप्रैल से जून तक पीक सीजन
आपको बता दें कि अप्रैल से जून तक शिमला में पर्यटन का पीक सीजन होता है, जब हजारों की संख्या में पर्यटक यहां आते हैं। सामान्य दिनों में शिमला में 3,000 से 6,000 कमर्शियल सिलेंडरों की मांग रहती है, जो सीजन में बढ़कर 7,000 से 8,000 तक पहुंच जाती है। ऐसे में गैस संकट का सीधा असर पर्यटन कारोबार पर पड़ने की आशंका है। ट्रैवल एजेंट्स के पास लगातार फोन आ रहे हैं और पर्यटक पूछ रहे हैं कि शिमला में भोजन की व्यवस्था सुचारु है या नहीं।

इंडक्शन और बिजली के उपकरणों की बढ़ती मांग
जब गैस के चूल्हों ने जवाब दे दिया, तो व्यापारियों ने वैकल्पिक रास्तों की तलाश शुरू कर दी है। शिमला के बाजारों में इंडक्शन चूल्हों और इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की मांग में अचानक भारी उछाल आया है। ढाबा संचालक अब चाय और नाश्ता बनाने के लिए बिजली के उपकरणों का सहारा ले रहे हैं। हालांकि, भारी खाना बनाने के लिए ये विकल्प भी नाकाफी साबित हो रहे हैं। 'शिमला होटल एंड टूरिज्म स्टेकहोल्डर्स एसोसिएशन' ने सरकार से गुहार लगाई है कि यदि जल्द ही सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो समर सीजन पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।

विधानसभा में गूंजा मामला: मुख्यमंत्री का बयान
यह मामला हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में भी प्रमुखता से उठा। विपक्ष और कुछ सत्ता पक्ष के विधायकों ने गैस आपूर्ति बाधित होने पर चिंता जताई। लाहौल-स्पीति की विधायक अनुराधा राणा ने मांग की कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी दूसरा सिलेंडर बुक करने की समय सीमा में ढील दी जाए। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में बयान दिया कि प्रदेश में घरेलू गैस की कोई किल्लत नहीं है, समस्या केवल कमर्शियल सप्लाई में आई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल का करीब 15 दिनों का स्टॉक सुरक्षित है। मुख्य सचिव स्वयं हर रोज एलपीजी सप्लाई की समीक्षा कर रहे हैं। राज्य सरकार केंद्र सरकार और तेल कंपनियों के साथ लगातार संपर्क में है ताकि आपूर्ति को तुरंत बहाल किया जा सके.