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शिमला नगर निगम में राजनीतिक विवाद: भाजपा पार्षदों का निलंबन

शिमला नगर निगम की मासिक बैठक में भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बहस हुई, जिसके परिणामस्वरूप भाजपा के नौ पार्षदों का निलंबन किया गया। महापौर सुरेंद्र चौहान ने कार्यवाही में बाधा डालने के आरोप में यह कदम उठाया। भाजपा पार्षदों ने महापौर के कार्यकाल के विस्तार पर सवाल उठाते हुए नारेबाजी की, जबकि कांग्रेस ने भाजपा पर जानबूझकर बैठक को बाधित करने का आरोप लगाया। जानें इस राजनीतिक संघर्ष की पूरी कहानी।
 

शिमला नगर निगम की बैठक में हंगामा

शिमला, जिसे पहाड़ों की रानी कहा जाता है, का नगर निगम शुक्रवार को राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बन गया। नगर निगम की मासिक आम बैठक के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जिसके परिणामस्वरूप महापौर सुरेंद्र चौहान ने भारतीय जनता पार्टी के नौ पार्षदों को कार्यवाही में बाधा डालने के आरोप में निलंबित कर दिया। इस निलंबन के बाद सदन में घंटों तक नारेबाजी और हलचल का माहौल बना रहा।


भाजपा के पार्षदों ने महापौर के कार्यकाल के विस्तार पर बैठक में व्यवधान उत्पन्न किया। जब उन्हें सदन से बाहर जाने का निर्देश दिया गया, तो उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी और कहा कि महापौर का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, इसलिए उन्हें निर्वाचित पार्षदों को निलंबित करने का अधिकार नहीं है। यह नारेबाजी कई मिनटों तक जारी रही। भाजपा सदस्यों ने यह भी कहा कि जब तक नई महिला महापौर का चुनाव नहीं हो जाता, वे निगम की कार्यवाही को नहीं चलने देंगे।


विपक्षी पार्षदों ने चौहान को सदन की अध्यक्षता करने से रोकने का प्रयास किया, यह कहते हुए कि उन्हें बैठक संचालित करने का अधिकार नहीं है। इस पर कांग्रेस के पार्षदों ने भी जवाबी नारेबाजी की और भाजपा पर जानबूझकर बैठक को बाधित करने का आरोप लगाया।


बाद में भाजपा पार्षदों ने मीडिया से कहा कि महापौर का कार्यकाल बढ़ाने वाला अध्यादेश छह जनवरी 2026 को समाप्त हो गया है और राज्य सरकार ने इस संबंध में कोई नई अधिसूचना जारी नहीं की है। उन्होंने कहा, “हमारा महापौर से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है, लेकिन आरक्षण रोस्टर के अनुसार अब एक महिला को महापौर चुना जाना चाहिए।” पार्षदों ने कांग्रेस पर महिला-विरोधी रुख अपनाने का आरोप लगाया।