शशि थरूर ने परिसीमन को राजनीतिक नोटबंदी बताया, महिला आरक्षण पर उठाए सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने हाल ही में परिसीमन को राजनीतिक नोटबंदी की संज्ञा दी है। उन्होंने महिला आरक्षण को संसद के विस्तार से जोड़ने के लिए सरकार की आलोचना की और कहा कि यह भारतीय महिलाओं की आकांक्षाओं को बंधक बनाने जैसा है। थरूर ने सभी राजनीतिक दलों में महिला आरक्षण पर सहमति की बात की और इसे तुरंत लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने परिसीमन की प्रक्रिया पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता भी बताई। जानें उनके विचार और चिंताएं इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर।
Apr 17, 2026, 14:19 IST
महिला आरक्षण और परिसीमन पर थरूर की चिंता
कांग्रेस के प्रमुख नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को परिसीमन को एक प्रकार की राजनीतिक नोटबंदी करार दिया। उन्होंने महिला आरक्षण को संसद के विस्तार से जोड़ने के लिए सरकार की आलोचना की। लोकसभा में महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन आयोग की स्थापना से संबंधित तीन विधेयकों पर चर्चा के दौरान, थरूर ने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना भारतीय महिलाओं की आकांक्षाओं को एक जटिल और विवादास्पद प्रशासनिक प्रक्रिया के हाथों बंधक बनाने जैसा है।
थरूर ने आगे कहा कि वर्तमान में महिला आरक्षण पर लगभग सभी राजनीतिक दलों में सहमति है। सभी प्रमुख दल मानते हैं कि प्रतीकों का समय समाप्त हो चुका है और अब सामूहिक साझेदारी का समय आ गया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने नारी शक्ति के लिए न्याय का उपहार लाने का दावा किया है, लेकिन इसे कंटीले तारों में लपेट दिया है, क्योंकि महिला आरक्षण को संसद सत्र के विस्तार, 2011 की जनगणना के आंकड़ों और परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ा गया है।
थरूर ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण की फसल कटने को तैयार है और इसे संसद में मौजूदा सीटों की संख्या के आधार पर तुरंत लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिसीमन का प्रस्ताव इतनी जल्दी लाया गया है, जितनी जल्दी नोटबंदी के समय किया गया था, और हम सभी जानते हैं कि उस समय देश को कितना नुकसान हुआ था। परिसीमन की प्रक्रिया को 'राजनीतिक नोटबंदी' में बदलने से बचना चाहिए।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि परिसीमन पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए, जिसमें छोटे और बड़े राज्यों के बीच संतुलन स्थापित किया जाना चाहिए, खासकर तमिलनाडु और केरल जैसे जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों का ध्यान रखा जाना चाहिए। थरूर ने यह भी कहा कि संसद में बैठक के दिन कम होते जा रहे हैं, और जब सदन में 850 सांसद होंगे, तो कार्यवाही संचालित करना और सभी सदस्यों को पर्याप्त अवसर देना कठिन होगा। उन्होंने इन विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने की मांग की।