शंकराचार्य को हाईकोर्ट से मिली राहत, POCSO मामले में गिरफ्तारी पर रोक
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को POCSO एक्ट के तहत दर्ज यौन उत्पीड़न मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। मामले की पृष्ठभूमि, आरोपों की गंभीरता और कोर्ट की सुनवाई के दौरान उठाए गए बिंदुओं पर चर्चा की गई है। स्वामी ने आरोपों को झूठा बताया है और जांच में सहयोग करने का आश्वासन दिया है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और आगामी सुनवाई की तिथियों के बारे में।
Feb 28, 2026, 15:59 IST
मामले का संक्षिप्त विवरण
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को POCSO एक्ट के तहत दर्ज यौन उत्पीड़न के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से महत्वपूर्ण अंतरिम राहत मिली है। यहां मामले की पूरी जानकारी और अद्यतन दी जा रही है (28 फरवरी 2026 तक की स्थिति के अनुसार):
मामले की पृष्ठभूमि
- FIR कब और कहां दर्ज हुई? यह मामला प्रयागराज (पूर्व में इलाहाबाद) के झूंसी थाने में 21-22 फरवरी 2026 के आसपास दर्ज किया गया। स्पेशल POCSO कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। शिकायतकर्ता आशुतोष पांडे (उर्फ आशुतोष ब्रह्मचारी) हैं, जो पहले स्वामी के शिष्य रह चुके हैं।
- आरोप क्या हैं? आरोप नाबालिग शिष्यों के साथ यौन शोषण और उत्पीड़न से संबंधित हैं। इनमें कुंभ/माघ मेले के दौरान हुई घटनाएं भी शामिल हैं। लागू धाराएं: POCSO एक्ट की धारा 3, 4(2), 6, 16, 17, 51 आदि के साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(3)। आरोपी: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी (प्रत्यक्षचैतन्य), और कुछ अज्ञात व्यक्ति।
- शंकराचार्य की प्रतिक्रिया स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को झूठा और बदनामी की साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि यह "एपस्टीन फाइल्स" जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है। वे नार्को एनालिसिस टेस्ट कराने के लिए तैयार हैं ताकि सत्य सामने आ सके। उन्होंने जांच में सहयोग करने का आश्वासन दिया है।
हाईकोर्ट में सुनवाई और निर्णय (27 फरवरी 2026)
- याचिका: गिरफ्तारी की आशंका में 24 फरवरी 2026 को अग्रिम जमानत की याचिका दायर की गई।
- सुनवाई: जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने 27 फरवरी को लगभग 1 घंटे तक सुनवाई की।
- बचाव पक्ष (वकील पीएन मिश्रा आदि): आरोप झूठे हैं, पुलिस रिपोर्ट में विरोधाभास है, यह एक साजिश है, कोई ठोस सबूत नहीं है।
- सरकारी पक्ष और शिकायतकर्ता: आरोपी प्रभावशाली हैं, गंभीर आरोप हैं (माइनर पीड़ित), केस प्रभावित होने की आशंका है।
- कोर्ट का आदेश:
- अग्रिम जमानत याचिका पर अंतिम निर्णय सुरक्षित रखा गया।
- अंतरिम राहत: अंतिम निर्णय आने तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और सह-आरोपी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई। कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
- निर्देश: स्वामी को जांच में सहयोग करना होगा। राज्य सरकार और शिकायतकर्ता को 12 मार्च तक लिखित जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा गया।
- अगली सुनवाई: मार्च 2026 के तीसरे हफ्ते में संभावित (होली अवकाश के बाद)।
राहत के बाद की स्थिति
- राहत मिलने पर अदालत में समर्थकों ने खुशी मनाई और तालियां बजाईं।
- स्वामी ने कहा: "झूठ की उम्र ज्यादा नहीं होती, सच सामने आ जाता है। कोर्ट ने हमारी दलीलों में दम पाया।"
- कुछ समर्थकों ने इसे "होली" की तरह मनाया।
- यह मामला धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ विपक्षी नेता इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं।
यह राहत अस्थायी है और अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी। जांच जारी है, और स्वामी को पुलिस/अदालत के निर्देशों का पालन करना होगा। यदि कोई नया अपडेट आएगा, तो स्थिति बदल सकती है।