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विपक्ष ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ उठाई आवाज़

20 जुलाई को 'संसद चलो' मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ विपक्ष ने विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से स्पष्टीकरण की मांग की है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत किया, जिसमें कहा गया कि आंदोलन होने से पुलिस की ज्यादती को सही नहीं ठहराया जा सकता। इस बीच, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सरकार के कानूनों के कार्यान्वयन पर सवाल उठाए हैं। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
 

विपक्ष का विरोध प्रदर्शन

20 जुलाई को आयोजित 'संसद चलो' मार्च के दौरान छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के खिलाफ विपक्ष ने अपना विरोध और तेज कर दिया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोमवार को कहा कि जब तक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण नहीं देते, तब तक संसद में यह विषय उठता रहेगा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का स्वागत किया, जिसमें कहा गया था कि केवल आंदोलन होने से पुलिस की ज्यादती को सही नहीं ठहराया जा सकता।


पुलिस कार्रवाई पर सवाल

पत्रकारों से बातचीत करते हुए खेड़ा ने कहा कि जब तक केंद्रीय गृह मंत्री जवाब नहीं देते, हम अपनी मांग (20 जुलाई को छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के लिए जवाबदेही) उठाते रहेंगे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद किया कि उन्होंने इस मुद्दे को उठाया। महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार के मामले में उन्होंने सवाल उठाया कि सादे कपड़ों में कौन लोग थे? क्या वे RSS के गुंडे थे? यह सब दिल्ली पुलिस के सामने हुआ और केंद्रीय गृह मंत्री को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी।


केंद्र सरकार की आलोचना

खेड़ा ने टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में परीक्षा सुधारों के लिए एक उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स बनाने पर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार कांग्रेस से जुड़े लोगों पर निर्भर है। खेड़ा ने कहा कि बीजेपी बिना कांग्रेस के काम नहीं कर सकती। उनके कई मुख्यमंत्री कहाँ से आए हैं? नरेंद्र मोदी तो कांग्रेस के बिना साँस भी नहीं ले सकते।


कांग्रेस सांसद का बयान

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' लाने के सरकार के निर्णय पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून को ठीक से लागू नहीं किया गया था। मसूद ने कहा कि पहले भी कानून बनाए गए थे, लेकिन उनका क्या हुआ? क्या वे कमजोर थे? आपको पहले उन्हें लागू करना चाहिए था। उस मामले में तो आपने चार्जशीट भी दाखिल नहीं की और मुख्य आरोपी बरी होकर आज़ाद हो गया।


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