विटामिन और आयरन सप्लीमेंट्स का ओवरडोज: जानें इसके खतरनाक प्रभाव
सप्लीमेंट्स का अनियंत्रित सेवन
कई लोग बिना चिकित्सकीय सलाह के फिट रहने के लिए विटामिन सप्लीमेंट्स का सेवन करने लगते हैं। इनमें विटामिन A, D, E और आयरन सबसे अधिक लोकप्रिय हैं। जब लोग अपने आहार से आवश्यक पोषक तत्व नहीं प्राप्त कर पाते, तो वे खुद को डॉक्टर बनाकर सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं। अक्सर थकान और कमजोरी को विटामिन की कमी समझा जाता है, जबकि यह शरीर में इन विटामिन्स या आयरन की अधिकता का संकेत भी हो सकता है।
सप्लीमेंट्स के दुष्प्रभाव
फंक्शनल न्यूट्रिशन विशेषज्ञ सुयश भंडारी के अनुसार, सही मात्रा में लिया गया सप्लीमेंट शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा कर सकता है, लेकिन इसकी अधिकता स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है। कई लोग आंतरिक पोषक तत्वों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं। हालांकि, इसकी अधिकता से विषाक्तता का खतरा बढ़ सकता है।
विटामिन D का अधिक सेवन
जब कोई व्यक्ति अत्यधिक विटामिन D का सेवन करता है, तो शरीर कैल्शियम को अधिक मात्रा में अवशोषित कर लेता है। यह अतिरिक्त कैल्शियम रक्त में प्रवाहित होता है और धमनियों तथा किडनी में जमा हो सकता है। अधिक विटामिन D से मतली, उल्टी, कब्ज, थकान, प्यास और पेशाब की अधिकता जैसे लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। समय पर उपचार न होने पर दिल और किडनी से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।
कैल्शियम का ओवरडोज
विटामिन D और मैग्नीशियम के स्तर की जांच किए बिना कैल्शियम की गोलियों का सेवन करने से नर्म ऊतकों में कैल्सीफिकेशन हो सकता है। जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के शोध में पाया गया कि कैल्शियम की कमी को सप्लीमेंट्स से पूरा करने वाले लोगों में हृदय की धमनियों में प्लाक जमने का खतरा 22% अधिक था।
विटामिन E और A का ओवरडोज
विटामिन E की अधिकता से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ सकता है, जिससे सूजन का खतरा होता है। वहीं, विटामिन A की अधिकता से हाइपरविटामिनोसिस हो सकता है, जो हड्डियों के घनत्व को कम करता है।
आयरन सप्लीमेंट्स का खतरा
बिना जांच के आयरन सप्लीमेंट्स का सेवन लिवर और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। आयरन की अधिकता से लिवर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है, जिससे लिवर सिरोसिस और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
सप्लीमेंट्स की आवश्यकता
डॉ. अनूप मिश्रा के अनुसार, सप्लीमेंट्स का सेवन केवल चिकित्सकीय सलाह पर ही करना चाहिए। कुछ विशेष परिस्थितियों में जैसे पोषक तत्वों का अवशोषण कम होना, कैंसर या लिवर रोग, हड्डियों की कमजोरी आदि में सप्लीमेंट्स की आवश्यकता हो सकती है।
क्या सभी को सप्लीमेंट्स की जरूरत है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई बीमारी नहीं है, तो आमतौर पर अलग से विटामिन या मिनरल सप्लीमेंट्स की आवश्यकता नहीं होती। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से पोषक तत्वों की कमी को पूरा किया जा सकता है।