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विजय की पार्टी ने तमिलनाडु में सरकार गठन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया

तमिल अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी, तमिलगा वेत्रि कडगम (टीवीके), ने विधानसभा चुनाव में बहुमत हासिल कर लिया है। विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार गठन के लिए आवश्यक समर्थन की पुष्टि की। कांग्रेस और वाम दलों का समर्थन मिलने से विजय की पार्टी ने 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। यह घटनाक्रम तमिलनाडु की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत को दर्शाता है। जानें इस राजनीतिक बदलाव का राष्ट्रीय स्तर पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
 

विजय की पार्टी की राजनीतिक सफलता

तमिल अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी, तमिलगा वेत्रि कडगम (टीवीके), विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और अब सरकार गठन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण प्रगति की है। लंबे समय से चल रहे राजनीतिक गतिरोध और गठबंधन के बदलते समीकरणों के बीच, विजय की पार्टी को बहुमत के लिए आवश्यक समर्थन मिल गया है। विजय ने आज शाम राज्यपाल से मुलाकात की और उन्हें सूचित किया कि उनके पास सरकार बनाने के लिए पर्याप्त बहुमत है।


समर्थन का जुगाड़

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और वीसीके ने विजय की पार्टी को समर्थन देने का निर्णय लिया है। हालांकि, ये दल बाहर से समर्थन देंगे और विजय के मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं बनेंगे। इन दलों के समर्थन से टीवीके ने 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। विजय की पार्टी ने चुनाव में 108 सीटें जीती थीं, लेकिन दो सीटों पर चुनाव लड़ने के कारण एक सीट छोड़नी होगी, जिससे प्रभावी संख्या 107 रह जाएगी। कांग्रेस के पांच विधायक और वामपंथी दलों के छह विधायकों के समर्थन से गठबंधन का आंकड़ा 118 तक पहुंच गया है।


कांग्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व की भूमिका इस घटनाक्रम में महत्वपूर्ण रही है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वाम दलों और वीसीके से बातचीत कर विजय की पार्टी का समर्थन हासिल करने में मदद की। कांग्रेस पहले ही डीएमके से अलग होकर विजय के साथ खड़ी हो चुकी थी, जिससे छोटे दलों पर सरकार गठन के लिए संख्या जुटाने का दबाव बढ़ गया।


वाम दलों की चिंताएं

वाम दलों का मानना है कि जनता के जनादेश को नजरअंदाज कर दोबारा चुनाव कराना उचित नहीं होगा। एक वाम नेता ने कहा कि राष्ट्रपति शासन लगाने की स्थिति से बचना आवश्यक है और जनता ने जिस बदलाव का समर्थन किया है, उसका सम्मान होना चाहिए। वीसीके ने भी स्पष्ट किया है कि तमिलनाडु की राजनीति में किसी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा।


राजनीतिक समीकरणों में बदलाव

इन दलों की एक और चिंता डीएमके और एआईएडीएमके के संभावित गठबंधन को लेकर है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि विजय सरकार बनाने में असफल रहते हैं, तो ये दोनों पुराने प्रतिद्वंद्वी दल एक साथ आ सकते हैं। हालांकि, वाम दलों का कहना है कि जनता ने पहले ही इन दोनों दलों को नकार दिया है, इसलिए कोई नया समीकरण स्वीकार्य नहीं होगा।


विजय की पार्टी की बैठकें

आज सुबह विजय की पार्टी के विधायक लगातार बैठकों में जुटे रहे। पार्टी नेताओं ने विश्वास जताया कि जिन दलों से समर्थन मांगा गया है, वे अंत तक साथ रहेंगे। दूसरी ओर, वाम दलों ने भी राज्य स्तर पर बैठकों के बाद समर्थन का अंतिम निर्णय लिया। इसके बाद वीसीके ने भी समर्थन देने की घोषणा की।


राजनीतिक बदलाव का राष्ट्रीय प्रभाव

तमिलनाडु की राजनीति में यह घटनाक्रम ऐतिहासिक माना जा रहा है। दशकों से राज्य की राजनीति डीएमके और एआईएडीएमके के इर्दगिर्द घूमती रही है, लेकिन विजय की पार्टी के उभार ने सत्ता की राजनीति का संतुलन बदल दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल सरकार गठन का मामला नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है।


डीएमके का कदम

इस बीच, इस राजनीतिक बदलाव का असर राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। डीएमके ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर संसद में अपनी पार्टी के सांसदों के बैठने की व्यवस्था बदलने की मांग की है। डीएमके सांसद कनिमोझी ने पत्र में कहा कि बदले हुए राजनीतिक हालात में कांग्रेस के साथ पहले जैसी बैठक व्यवस्था उचित नहीं रह गई है।


विपक्षी गठबंधन पर प्रभाव

डीएमके का यह कदम विपक्षी गठबंधन इंडिया के भविष्य को लेकर भी बड़े संकेत दे रहा है। कांग्रेस और डीएमके के बीच दशकों पुराना गठबंधन टूटने से विपक्षी एकता पर सवाल खड़े हो गए हैं। कुछ विपक्षी दल इसे भाजपा और राजग को रोकने के लिए रणनीतिक कदम बता रहे हैं, जबकि कई नेता इसे राजनीतिक विश्वासघात मानते हैं। समाजवादी पार्टी प्रमुख ने भी बिना नाम लिए कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा है कि वह मुश्किल समय में अपने सहयोगियों का साथ छोड़ने वालों में नहीं हैं।


नए राजनीतिक समीकरण का महत्व

तमिलनाडु में विजय की सरकार अब केवल राज्य की सत्ता परिवर्तन की कहानी नहीं रह गई है, बल्कि इसने राष्ट्रीय राजनीति, विपक्षी गठबंधनों और भविष्य की चुनावी रणनीतियों पर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह नया राजनीतिक समीकरण केवल तमिलनाडु तक सीमित रहता है या फिर राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी बदल देता है।