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वाराणसी में गंगा इफ्तार विवाद: हाई कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

वाराणसी में गंगा नदी पर आयोजित इफ्तार पार्टी के विवाद ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया है। कोर्ट ने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। इस मामले में 8 आरोपियों को जमानत दी गई है, जबकि पुलिस द्वारा लगाए गए जबरन वसूली के आरोपों पर सवाल उठाए गए हैं। जानें इस विवाद का पूरा विवरण और कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ।
 

गंगा इफ्तार विवाद का मामला

वाराणसी में गंगा नदी पर आयोजित इफ्तार पार्टी और चिकन बिरयानी के अवशेष फेंकने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है। अदालत ने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। इस मामले में आरोपियों के पछतावे को देखते हुए 8 लोगों को जमानत दी गई है।


कोर्ट की धार्मिक आस्था पर टिप्पणी

जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की एकल पीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि गंगा नदी में मांसाहारी भोजन करना और उसके अवशेषों को फेंकना हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पवित्र स्थलों पर ऐसा कोई कृत्य नहीं होना चाहिए जो सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करे।


आरोपियों की जमानत मंजूर

हाई कोर्ट ने 14 में से 8 मुस्लिम युवकों की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। अदालत ने पुलिस द्वारा लगाए गए जबरन वसूली के आरोपों पर सवाल उठाए और कहा कि ये आरोप संदिग्ध हैं। चूंकि आरोपी गरीब बुनकर हैं और उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, इसलिए उन्हें और अधिक समय तक जेल में रखना उचित नहीं है।


सोशल मीडिया पर जांच जारी

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने आरोपियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर तनाव फैलाने की साजिश का आरोप लगाया। हालांकि, हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिस इस मामले की जांच जारी रख सकती है, बिना आरोपियों को जेल में रखे।


क्या हुआ था?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब मार्च में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कुछ युवक गंगा नदी में इफ्तार कर रहे थे और चिकन बिरयानी के अवशेष नदी में फेंक रहे थे। इस वीडियो के बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष की शिकायत पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और 14 लोगों को गिरफ्तार किया।