वट सावित्री व्रत पूजा विधि: जानें महत्वपूर्ण बातें और नियम
वट सावित्री व्रत 2026 का पर्व 16 मई को मनाया जाएगा। यह सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। जानें इस व्रत की पूजा विधि, महत्वपूर्ण नियम और पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए सुझाव। सही रंगों का चयन, पूर्ण श्रृंगार और बरगद की पूजा के नियमों का पालन करें।
May 15, 2026, 21:53 IST
वट सावित्री व्रत पूजा विधि
16 मई 2026, शनिवार को वट सावित्री का पवित्र पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है और हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या को मनाया जाता है।
यदि आप इस वर्ष पहली बार वट सावित्री व्रत करने जा रही हैं, तो कुछ महत्वपूर्ण बातों और नियमों का पालन करना आवश्यक है। अन्यथा, आपको इस व्रत का पूरा फल नहीं मिल पाएगा।
पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए सुझाव
- अशुभ रंगों से बचें: वट सावित्री व्रत के दिन नीला, काला, सफेद और ग्रे जैसे रंगों के कपड़े पहनने से बचें। इसके बजाय लाल, पीला और गुलाबी जैसे शुभ रंगों का चयन करें।
- पूर्ण श्रृंगार करें: यह पर्व सुहागिनों के लिए है, इसलिए इस दिन पूरा सोलह श्रृंगार करें और फिर पूजा आरंभ करें।
- साफ-सफाई का ध्यान रखें: पूजा से पहले बरगद के पेड़ के आसपास की जगह को अच्छे से साफ करें और गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें।
- सुबह स्नान करें: प्रात: उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और व्रत का संकल्प लें।
- पूजा सामग्री: पूजा में बांस का पंखा, कच्चा सूत, भीगे हुए चने और सोलह श्रृंगार की सामग्री शामिल करें।
- बरगद पेड़ की परिक्रमा: पूजा के दौरान वट वृक्ष की परिक्रमा करें और कच्चा सूत लपेटें। परिक्रमा 5, 7, 11 या 108 बार करें।
- व्रत कथा सुनें: सावित्री और सत्यवान की कथा सुनना आवश्यक है। पूजा के बाद सावित्री माता और यम देवता से अपने पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करें।
- दान करें: पूजा के बाद अपनी सास को पैसे देकर आशीर्वाद लें और पूजा सामग्री किसी ब्राह्मण को दान करें।
- मन को शांत रखें: व्रत के दौरान किसी भी प्रकार के विवाद या नकारात्मक सोच से बचें।
वट सावित्री व्रत 2026 की तारीख और शुभ मुहूर्त
वट सावित्री व्रत की तारीख: 16 मई 2026, शनिवार
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 16 मई 2026 को 05:11 ए.एम.
अमावस्या तिथि समाप्त: 17 मई 2026 को 01:30 ए.एम.