वट सावित्री व्रत: गलती से टूटने पर क्या करें?
वट सावित्री व्रत का महत्व
वट सावित्री व्रत का महत्व: 16 मई 2026, शनिवार को वट सावित्री का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है और हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या को मनाया जाता है। हालांकि, कभी-कभी शारीरिक कमजोरी या गलती से कुछ खा लेने के कारण व्रत टूट सकता है, जिससे महिलाएं चिंतित हो जाती हैं कि अब क्या करें?
व्रत टूटने पर क्या करें?
यदि व्रत अनजाने में टूट गया है, तो इसे अपराध नहीं माना जाता। हिंदू धर्म में मानसिक संकल्प का बड़ा महत्व है। यदि आपके मन में व्रत को पूरा करने की सच्ची श्रद्धा है, तो छोटी सी गलती पर उपवास को बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, यदि आपने अनजाने में कुछ खा लिया है, तो व्रत को वहीं से जारी रखना चाहिए।
अनजाने में हुई गलती का प्रायश्चित कैसे करें?
- स्नान करें – सबसे पहले आचमन करें और हाथ-मुंह धोकर पवित्र हो जाएं। यदि संभव हो, तो दोबारा स्नान करें।
- माफी मांगें – भगवान विष्णु, माता सावित्री और यमराज के सामने हाथ जोड़कर अपनी भूल स्वीकार करें। फिर इस मंत्र का जाप करें: “अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया। दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर॥”
- हवन और दान – व्रत टूटने के दोष को कम करने के लिए गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करें या घर में छोटा सा हवन करें।
इसके अलावा, किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को सफेद अनाज, फल और अपनी सामर्थ्यानुसार दान करें। इससे व्रत टूटने का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है।
वट सावित्री व्रत का महत्व
यह व्रत अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसका संबंध माता सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा से है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए, तो सावित्री ने तप, प्रेम और दृढ़ संकल्प के माध्यम से अपने पति के प्राण वापस पा लिए। इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है।