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लोकसभा में महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और मतदान की तैयारी

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विशेष संसदीय सत्र में तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और मतदान की प्रक्रिया की घोषणा की। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने चर्चा के समय को बढ़ाने का सुझाव दिया, जबकि कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने विधेयकों को एक साथ लाने पर आपत्ति जताई। जानें इस प्रक्रिया के पीछे की राजनीति और विधेयकों के प्रस्तुतिकरण के बारे में।
 

लोकसभा अध्यक्ष की घोषणा

गुरुवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि विशेष संसदीय सत्र के दौरान तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर 15 से 18 घंटे तक चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि इन विधेयकों पर मतदान शुक्रवार को शाम 4 बजे होगा।


स्पीकर बिरला ने सदन में अपने संबोधन में कहा कि इन विधेयकों पर चर्चा का समय 15 से 18 घंटे तक रहेगा। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस बात की पुष्टि की कि बहस 12 घंटे तक चलेगी और उन्होंने सुझाव दिया कि स्पीकर को चर्चा का समय बढ़ाने का अधिकार होना चाहिए।


विपक्ष की आपत्ति

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने तीनों विधेयकों को एक साथ विचार करने पर आपत्ति जताते हुए इसे संसदीय प्रक्रिया का उल्लंघन बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। वेणुगोपाल ने सवाल उठाया कि यदि संविधान संशोधन विधेयक खारिज होने की संभावना है, तो इसे आगे बढ़ाने का क्या औचित्य है।


उन्होंने कहा कि एक संविधान संशोधन विधेयक है और अन्य दो विधेयक अभी लाए जा रहे हैं, इसलिए इन्हें एक साथ लाना उचित नहीं होगा।


विधेयकों का प्रस्तुतिकरण

गुरुवार को सरकार ने लोकसभा में विपक्ष के विरोध के बीच महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन और परिसीमन से संबंधित तीन विधेयकों को पेश किया। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ और ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ पेश किए, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश किया।


‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ के पक्ष में 251 वोट और विरोध में 185 वोट पड़े।