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लोकसभा में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक पारित

लोकसभा ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 करने का विधेयक पारित किया। यह विधेयक विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच बिना चर्चा के पारित हुआ। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इसे न्यायिक सुधारों की श्रृंखला का हिस्सा बताया। जानें इस विधेयक के पीछे के कारण और इसके प्रभाव।
 

विधेयक का पारित होना

नई दिल्ली, तीन अगस्त: लोकसभा ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 करने का विधेयक पारित किया। यह विधेयक विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच बिना किसी चर्चा के पारित हुआ। सदन की बैठक दो बार स्थगित होने के बाद अपराह्न दो बजे शुरू हुई, जहां कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश किया। इस दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सदस्य राम मंदिर चढ़ावा चोरी और दिल्ली में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दों पर नारेबाजी कर रहे थे।


विपक्ष का हंगामा

पीठासीन सभापति कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने हंगामा कर रहे सदस्यों से शांति बनाए रखने का आग्रह किया और विधेयक पर चर्चा में भाग लेने के लिए कहा, लेकिन हंगामा जारी रहा। अंततः सदन ने विपक्षी सदस्यों के शोर के बीच ही विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे पहले, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय द्वारा राष्ट्रपति के मई में लागू किए गए अध्यादेश को नामंजूर करने के प्रस्ताव को अस्वीकृत किया गया।


विधेयक का उद्देश्य

विधेयक पर कुछ विपक्षी संशोधनों को भी खारिज किया गया। मेघवाल ने विधेयक को पेश करते हुए कहा कि यह न्यायिक सुधारों की श्रृंखला का हिस्सा है, जिसके तहत उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई जा रही है। यह विधेयक मानसून सत्र के पहले दिन 20 जुलाई को सदन में पेश किया गया था।


पिछले निर्णय

इस वर्ष मई में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए विधेयक को मंजूरी दी थी, जिसके बाद सरकार ने अध्यादेश जारी किया। इस अध्यादेश के तहत उच्चतम न्यायालय में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई। इससे पहले, 2019 में न्यायाधीशों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33 की गई थी। मेघवाल ने बताया कि स्वतंत्र भारत में शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की गई थी और अगस्त 1956 में पारित विधेयक के माध्यम से कुल न्यायाधीशों की संख्या 11 की गई थी।


न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि

उन्होंने कहा कि लंबित मामलों की संख्या को कम करने के लिए न्यायाधीशों की संख्या अब 34 से बढ़ाकर 38 की गई है।