लोकसभा परिसीमन विधेयक पर कांग्रेस और DMK के बीच बढ़ता विवाद
राजनीतिक हलचल का नया दौर
लोकसभा सीटों की संख्या में वृद्धि और परिसीमन से जुड़े संभावित संविधान संशोधन विधेयक ने राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के तमिलनाडु दौरे के दौरान दिए गए बयान ने कांग्रेस और द्रमुक (DMK) के बीच तीखी बहस को जन्म दिया है। इस विवाद ने न केवल विपक्षी गठबंधन की एकता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि भाजपा को भी राजनीतिक लाभ उठाने का मौका दिया है।
राहुल गांधी का बयान
राहुल गांधी ने तमिलनाडु में कहा कि यदि कोई पार्टी संसद में परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन करती है, तो वह तमिलनाडु के साथ "विश्वासघात" कर रही होगी। उन्होंने ऐसे दलों की तुलना 21वीं सदी के "एट्टप्पन" से की, जिन्हें गद्दारी का प्रतीक माना जाता है। यह बयान तब आया है जब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि DMK इस मुद्दे पर अपने रुख को नरम कर सकती है।
DMK की प्रतिक्रिया
DMK ने राहुल गांधी की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के वरिष्ठ सांसद दयानिधि मारन ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि "जिन्होंने कुछ मंत्री पदों के लिए हमारा भरोसा बेचा, उन्हें विश्वासघात की बात करने का कोई अधिकार नहीं है।" उन्होंने कांग्रेस को "जहरीला सांप" करार देते हुए कहा कि सत्ता पाने के लिए उसने भरोसे का सौदा किया।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस और DMK के बीच बढ़ती तल्खी का फायदा भाजपा उठा सकती है। भाजपा को उम्मीद है कि दोनों दलों के रिश्तों में खटास के कारण DMK संसद में परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर अपने रुख पर पुनर्विचार कर सकती है। हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी तक इस विधेयक को दोबारा लाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
DMK का रुख
DMK ने कहा है कि वह किसी भी विधेयक पर अंतिम निर्णय उसके प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद ही करेगी। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी प्रस्ताव से दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु के हित प्रभावित होते हैं, तो उसका समर्थन नहीं किया जाएगा।
विपक्ष का विरोध
विपक्षी दलों का आरोप है कि परिसीमन के जरिए लोकसभा क्षेत्रों का पुनर्गठन इस तरह किया जा सकता है जिससे 2029 के आम चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगी दलों को राजनीतिक लाभ मिले। इसी कारण विपक्ष पहले भी इस प्रस्ताव का विरोध करता रहा है।
कांग्रेस का हमला
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) के अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने भी परिसीमन के मुद्दे पर भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा जनता के बढ़ते असंतोष से बचने के लिए परिसीमन विधेयक को संसद में पारित कराने की कोशिश कर रही है।
कावेरी विवाद पर टिप्पणी
टैगोर ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और तमिलनाडु सरकार के बीच कावेरी तथा मेकेदातु परियोजना को लेकर मतभेदों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद हैं और इसे आंतरिक राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए।
भविष्य की चुनौतियाँ
परिसीमन का मुद्दा अब केवल संसदीय प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने तमिलनाडु की राजनीति, कांग्रेस-DMK संबंधों और विपक्षी एकता को नई चुनौती दी है। यदि केंद्र सरकार इस विधेयक को संसद में लाती है, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्षी दल अपनी पुरानी एकजुटता बनाए रखते हैं या नए समीकरणों के चलते नए रुख अपनाते हैं।