लेबनान पर इजराइली हमले से ईरान और अमेरिका के सीजफायर पर संकट
सीजफायर संकट में
लेबनान पर इजराइल के हमले ने ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध विराम को महज 24 घंटे में ही संकट में डाल दिया है। ईरान ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि लेबनान पर हमले जारी रहे, तो वह युद्ध विराम समझौते पर चर्चा नहीं करेगा। इस स्थिति में अमेरिका ने अपनी स्थिति को कमजोर पाया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि इजराइल बातचीत के दौरान लेबनान पर केवल सीमित हमले करेगा। बुधवार को बेरूत में 10 मिनट के भीतर 160 बम गिराए गए।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान ने इस हमले को युद्ध विराम का उल्लंघन मानते हुए कहा है कि सीजफायर की शर्तों में लेबनान पर हमले को रोकना शामिल था। ईरान के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा अमेरिका के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट का हवाला दिया।
इजराइल के हमले के कारण
इजराइल ने लेबनान पर हमले के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से सहमति प्राप्त की है। एक अमेरिकी मीडिया आउटलेट के अनुसार, ट्रंप ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात करते हुए कहा कि वे लेबनान पर हमले को जारी रख सकते हैं। इसके अलावा, इजराइल का लक्ष्य हिजबुल्लाह को पूरी तरह से समाप्त करना भी है।
ईरान का समर्थन
ईरान के संसद के स्पीकर एम. गालिबफ ने कहा है कि यदि लेबनान पर हमले जारी रहे, तो वे संवर्धित यूरेनियम को समाप्त नहीं करेंगे। गालिबफ ईरान की वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं। ईरान ने सीजफायर के बाद भी लेबनान पर हमले के कारण वार्ता को नहीं खोला है।
ईरान और लेबनान का संबंध
लेबनान इजराइल का पड़ोसी देश है और वहां हिजबुल्लाह का शासन है, जो ईरान का करीबी सहयोगी माना जाता है। ईरान का मानना है कि यदि वह हिजबुल्लाह का समर्थन नहीं करता है, तो यह संगठन खुद को ठगा हुआ महसूस करेगा। इसके अलावा, ईरान को यह चिंता है कि यदि लेबनान को छोड़ दिया गया, तो इजराइल का प्रभाव मध्य पूर्व में बढ़ सकता है।
भौगोलिक महत्व
लेबनान की भौगोलिक स्थिति भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भूमध्य सागर से जुड़ा हुआ है। ईरान पहले से ही फारस की खाड़ी और लाल सागर पर नजर रखता है और लेबनान के माध्यम से भूमध्य सागर में अपनी उपस्थिति बढ़ा सकता है।