लेबनान और इजराइल के बीच सीजफायर का विस्तार, शांति वार्ता की उम्मीदें बढ़ीं
सीजफायर का विस्तार
लेबनान और इजराइल ने आपसी सहमति से सीजफायर को तीन हफ्तों के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह महत्वपूर्ण फैसला व्हाइट हाउस में आयोजित एक बैठक के बाद लिया गया, जिसकी जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति ने साझा की। इस बैठक में इजराइल के राजदूत येचिएल लाइटर और लेबनान की राजदूत नदा मोवावाद शामिल हुए। यह वार्ता ऐसे समय में हुई जब इजराइली हमलों में कम से कम पांच लोगों की जान गई, जिनमें एक पत्रकार भी शामिल थीं।
बैठक के मुख्य बिंदु
राष्ट्रपति ने बैठक को सकारात्मक बताया और कहा कि अमेरिका लेबनान को हिज्बुल्लाह से सुरक्षा प्रदान करने में मदद करेगा। हालांकि, हिज्बुल्लाह के प्रतिनिधि इस बैठक में उपस्थित नहीं थे। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वह जल्द ही इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन को अमेरिका आमंत्रित करना चाहते हैं। उनका मानना है कि इस तीन हफ्तों के युद्धविराम के दौरान दोनों देशों के बीच शांति समझौता होने की संभावना है।
सीजफायर की समयसीमा
सीजफायर रविवार को समाप्त होने वाला था। इस बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति, विदेश मंत्री, इजराइल में अमेरिकी राजदूत और लेबनान में अमेरिकी राजदूत भी शामिल थे। इजराइल और लेबनान के राजदूतों के बीच बातचीत के बाद 17 अप्रैल को 10 दिन का सीजफायर लागू हुआ था।
हिंसा की स्थिति
हालांकि सीजफायर के दौरान हिंसा में कमी आई है, लेकिन दक्षिण लेबनान में हमले पूरी तरह से समाप्त नहीं हुए हैं। इजराइली सेना ने यहां एक बफर जोन स्थापित किया है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हाल के हमलों में तीन लोगों की मौत हुई और दो लोग घायल हुए, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है।
लेबनान की मांगें
बैठक में लेबनान ने इजराइल से अपनी सेना वापस बुलाने, बंदियों को रिहा करने और सीमा को स्पष्ट करने की मांग की। वहीं, इजराइल चाहता है कि लेबनान सरकार हिज्बुल्लाह को कमजोर करने के लिए सहयोग करे। लेबनान सरकार पिछले एक साल से इस संगठन को शांतिपूर्ण तरीके से निरस्त्र करने का प्रयास कर रही है।
संघर्ष का इतिहास
यह संघर्ष 2 मार्च को फिर से शुरू हुआ था, जब हिज्बुल्लाह ने ईरान के समर्थन में हमला किया। तब से अब तक लगभग 2,500 लोगों की जान जा चुकी है। इजराइल ने दक्षिण लेबनान के 5 से 10 किमी तक के क्षेत्र पर नियंत्रण कर रखा है ताकि अपने उत्तरी हिस्से को हमलों से सुरक्षित रखा जा सके।