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लालू प्रसाद यादव ने 'जमीन के बदले नौकरी' मामले में सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया

आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने 'जमीन के बदले नौकरी' भ्रष्टाचार मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्णय को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है। यह मामला 2004 से 2009 के बीच उनके रेल मंत्री रहते हुए हुए कथित भ्रष्टाचार से संबंधित है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और लालू के तर्कों के बारे में।
 

लालू प्रसाद यादव का सर्वोच्च न्यायालय में कदम

आरजेडी के नेता लालू प्रसाद यादव ने 'जमीन के बदले नौकरी' भ्रष्टाचार मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्णय को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का सहारा लिया है। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ 13 अप्रैल को इस याचिका की सुनवाई करेगी। इससे पहले, दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रविंदर दत्त देजा ने लालू की एफआईआर और उनके खिलाफ दायर आरोपपत्रों को रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया था। अदालत ने इस मामले में दायर तीन आरोपपत्रों को बरकरार रखा और निचली अदालत द्वारा मामले का संज्ञान लेने की स्वीकृति दी।


‘जमीन के बदले नौकरी’ मामले का विवरण

यह मामला लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुए 2004 से 2009 के बीच हुए कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि जबलपुर स्थित भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में, कथित तौर पर उपहार में दी गई या हस्तांतरित जमीन के बदले 'ग्रुप डी' रेलवे की नौकरियां दी गईं। लालू ने यह तर्क दिया कि एफआईआर, जांच और आरोपपत्र कानूनी दृष्टि से गलत थे, और यह भी कहा कि सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत पूर्व अनुमति नहीं ली थी, जिससे यह कार्यवाही अमान्य हो जाती है।