लखीमपुर खीरी में एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण पर रोक
भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में प्रशासन का बड़ा कदम
लखीमपुर खीरी। शामली-गोरखपुर हाई स्पीड एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रशासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। जिले के चार तहसीलों के लगभग 50 गांवों में भूमि की खरीद-बिक्री, भूमि उपयोग में परिवर्तन और अनधिकृत निर्माण गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
यह प्रतिबंध मोहम्मदी, गोला, मितौली और लखीमपुर तहसीलों के प्रभावित गांवों पर लागू किया गया है। प्रशासन ने यह कदम एक्सप्रेसवे के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए उठाया है। तहसीलदार मुकेश कुमार वर्मा ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि गजट अधिसूचना जारी होने तक इन गांवों में बैनामा दर्ज करना, भूमि का स्वरूप बदलना या नए निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। गजट नोटिफिकेशन के बाद ही प्रभावित भूमि के गाटा नंबरों के आधार पर अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी.
प्रभावित क्षेत्र
सदर तहसील के प्रमुख गांवों में गौरिया, कोटखेरवा, मूसेपुर कलां, रमई मुबारकपुर, सैदपुर करनपुर, कोढैया, परसेहरा ओयल, सरखनपुर, फत्तेपुर, हसनापुर ओयल, सरैया, पेन्योरा, पिपरिया अंडू, गुठना बुजुर्ग, बेलवा, सरांय सूरज, मूड़ाधामू, टीकर, दुसरू, डिम्हौरा, महमदाबाद, मूसेपुर खुर्द, मरखापुर, कादीपुर और चककमलापुर शामिल हैं। मितौली तहसील के प्रभावित गांवों में नैनेपारा, नौरंगपुर, अतरौली, पुरैना, हुसैनपुर, सल्लिहाबाद, किशुनपुर, मूडाबुजुर्ग, प्रतापपुर और सनिगवां आदि हैं। कुल मिलाकर इन चार तहसीलों के करीब 50 गांव एक्सप्रेसवे के रूट में आने वाले हैं.
यह रोक तब तक लागू रहेगी जब तक उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। किसानों और भूमि मालिकों को भूमि अधिग्रहण के नियमों के अनुसार उचित मुआवजा दिए जाने की व्यवस्था की जाएगी। शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाला महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। यह ग्रीनफील्ड कॉरिडोर कई जिलों से होकर गुजरेगा और क्षेत्रीय विकास को नई गति प्रदान करेगा.