लखनऊ में स्मार्ट मीटरों की रीडिंग में बढ़ोतरी, उपभोक्ताओं में चिंता
लखनऊ में मीटर रीडिंग में अंतर
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चेक मीटरों और स्मार्ट मीटरों की रीडिंग में असमानता देखी गई है। कुछ उपभोक्ताओं के मीटर में 2 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने के दौरान, कुछ घरों में पुराने मीटर को चेक मीटर के रूप में बनाए रखा गया था। अब इन मीटरों को हटाने की प्रक्रिया चल रही है। हाल ही में हटाए गए चेक मीटरों की रीडिंग की तुलना स्मार्ट मीटरों से की गई, जिसमें स्मार्ट मीटरों की रीडिंग अधिक पाई गई।
केंद्र सरकार की रिवैंप डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के तहत पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटरों से बदला जा रहा है। योजना के तहत यह तय किया गया था कि पुराने में से 5 प्रतिशत मीटर को बदलते समय बनाए रखा जाएगा। इन मीटरों की रीडिंग का मिलान स्मार्ट मीटरों से किया जाना था।
गोमतीनगर के विशाल खंड में विनोद तिवारी के घर पर जब पुराना मीटर हटाया गया, तो स्मार्ट मीटर ने पुराने मीटर की तुलना में 52 यूनिट अधिक रीडिंग दिखाई, जो 2.2 प्रतिशत की वृद्धि है। इसी क्षेत्र में एक अन्य मीटर की रीडिंग में 41 यूनिट का अंतर पाया गया, जिसमें स्मार्ट मीटर की रीडिंग 1.15 प्रतिशत अधिक थी। 14 मई को एक अन्य उपभोक्ता के मीटर की रीडिंग में पुराना मीटर 3452 यूनिट दिखा रहा था, जबकि स्मार्ट मीटर ने 3501 यूनिट दर्ज किया। इस वृद्धि के बावजूद उपभोक्ता को दी गई पर्ची में रीडिंग को लगभग समान बताया गया।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि त्रुटि की गुंजाइश दोनों तरह से हो सकती है, लेकिन यह अजीब है कि सभी मामलों में रीडिंग अधिक ही आ रही है। यूपी में 3.80 करोड़ उपभोक्ता हैं, जिनमें से 85 लाख के पास स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। मीटरों की गुणवत्ता की जांच बेंगलुरु स्थित केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) से करवाई जानी चाहिए।
विभाग के अभियंताओं का कहना है कि रीडिंग में 0.5 से 1.0 प्रतिशत का अंतर सामान्य है। हालांकि, यह सवाल उठता है कि यह अंतर बढ़ क्यों रहा है। हाल के दिनों में उपभोक्ताओं से वीडियो रिकॉर्ड करवाए जा रहे हैं कि वे स्मार्ट मीटर से संतुष्ट हैं, लेकिन उन्हें दिए जा रहे दस्तावेजों में रीडिंग में अंतर स्पष्ट है।