लखनऊ में वकीलों और पुलिस के बीच हिंसक टकराव, कोर्ट परिसर में मचा हड़कंप
लखनऊ जिला कोर्ट के बाहर तनावपूर्ण स्थिति
राजधानी लखनऊ के जिला न्यायालय के बाहर रविवार को एक गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई। इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर नगर निगम और पुलिस ने अवैध वकील चैंबरों को हटाने का प्रयास किया, जिसके चलते सैकड़ों वकील सड़क पर उतर आए। विरोध इतना तीव्र हो गया कि पथराव, धक्का-मुक्की और लाठीचार्ज की स्थिति बन गई। कई घंटों तक कोर्ट परिसर और उसके आस-पास का क्षेत्र युद्धभूमि में बदल गया।
हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई की शुरुआत
इस विवाद की जड़ उन अवैध चैंबरों में है, जिनका उपयोग वकील वर्षों से जिला न्यायालय परिसर के आसपास कर रहे थे। 2020 में सदर तहसील क्षेत्र में कुछ चैंबरों को हटाने के बाद यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ तक पहुंचा था। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।
7 मई को हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का स्पष्ट आदेश दिया। इसके बाद 12 मई को नगर निगम की टीम ने संबंधित चैंबरों पर नोटिस चस्पा किया और उन्हें खाली करने का निर्देश दिया। नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद रविवार को प्रशासन कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंचा।
बुलडोजर के सामने वकीलों का आक्रोश
रविवार की सुबह जब नगर निगम की टीम बुलडोजर और भारी पुलिस बल के साथ जिला कोर्ट के बाहर पहुंची, तो वकीलों में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में वकील सड़क पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
कुछ वकील बुलडोजर के सामने खड़े हो गए और कार्रवाई रोकने की मांग करने लगे। कई अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उनके चैंबर तोड़े जा रहे हैं, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस और वकीलों के बीच झड़प शुरू हो गई।
आत्महत्या की धमकी देने वाले वकील
घटना का एक संवेदनशील पहलू तब सामने आया जब एक युवा अधिवक्ता ने अपने चैंबर को अंदर से बंद कर लिया और कथित तौर पर आत्महत्या की धमकी देने लगा। इसे देखकर मौके पर मौजूद अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। कुछ अन्य वकीलों ने भी खुद को चैंबर के भीतर बंद कर लिया और प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध किया।
पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब स्थिति बिगड़ने लगी, तो चैंबरों के दरवाजे तोड़कर वकीलों को बाहर निकाला गया। इस दौरान कई अधिवक्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच हाथापाई भी हुई।
पथराव और लाठीचार्ज की घटना
स्थिति उस समय पूरी तरह बिगड़ गई जब कुछ प्रदर्शनकारी वकीलों ने पुलिस और नगर निगम की टीम पर पथराव शुरू कर दिया। पुलिस ने पहले भीड़ को हटाने की कोशिश की, लेकिन जब पत्थरबाजी तेज हुई तो बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने लाठीचार्ज कर उपद्रवियों को खदेड़ा।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कई पुलिसकर्मी एक अधिवक्ता को घेरकर लाठियां बरसाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर वकील भी लगातार पथराव करते नजर आ रहे हैं। इस टकराव में कई अधिवक्ता और कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए हैं.
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की प्रतिक्रिया
संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने मौके पर बड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। चार एसीपी, पीएसी और 10 थानों की पुलिस फोर्स को तैनात किया गया था। नगर निगम की टीम ने चैंबरों को तोड़ने के साथ वहां रखी कुर्सियां, चटाइयां और अन्य सामान वाहनों में भरकर कब्जे में लिया।
जिला न्यायालय परिसर और आसपास के क्षेत्र में तनाव बना रहा। अधिवक्ताओं का कहना है कि वे इस कार्रवाई के खिलाफ संघर्ष करेंगे। वहीं प्रशासन का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन करना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी रहेगी.