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लखनऊ में लापता बच्चियों का मामला: हाईकोर्ट ने पुलिस को दिए सख्त निर्देश

लखनऊ में लापता किशोरियों और युवा लड़कियों के मामलों को लेकर हाईकोर्ट ने गंभीरता दिखाई है। पुलिस को 34 बच्चियों के मामलों की प्रगति रिपोर्ट 3 जुलाई तक पेश करने का आदेश दिया गया है। पिछले 6 महीनों में 261 घटनाओं में से 227 बच्चियों को सुरक्षित बरामद किया गया है, लेकिन 34 बच्चियों का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई की सराहना की है, लेकिन लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
 

लखनऊ में लापता बच्चियों की स्थिति


लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लापता, अगवा और घर से गायब किशोरियों और युवा लड़कियों के मामलों को लेकर हाईकोर्ट ने गंभीरता दिखाई है। एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने लखनऊ पुलिस कमिश्नर को विस्तृत प्रगति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।


पुलिस की कार्रवाई पर हाईकोर्ट की नजर

हाईकोर्ट ने पिछले 6 महीनों में हुई 261 घटनाओं में से 227 बच्चियों को सुरक्षित बरामद करने के लिए पुलिस की कार्रवाई की सराहना की है। इस दौरान डीसीपी और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने अदालत में उपस्थित होकर जांच की जानकारी साझा की।


लापता बच्चियों के मामले की गंभीरता

राजधानी में लापता और अगवा होने वाली नाबालिग और बालिग लड़कियों का मामला अब हाईकोर्ट में पहुंच चुका है। कोर्ट ने विशेष रूप से उन 34 बच्चियों के मामलों को गंभीरता से लिया है, जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है।


हाईकोर्ट ने लखनऊ पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वे इन 34 लंबित मामलों की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट 3 जुलाई तक प्रस्तुत करें, साथ ही एक शपथ पत्र भी दाखिल करें।


34 बच्चियों की खोज में पुलिस की चुनौतियाँ

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पिछले 6 महीनों में अपहरण, बहला-फुसलाकर ले जाने या लापता होने की कुल 261 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें से 227 बच्चियों को पुलिस ने खोजकर सुरक्षित बरामद किया है, लेकिन 34 बच्चियों का अभी भी कोई पता नहीं चल पाया है।


डीसीपी समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि यदि लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि लापता बच्चियों की बरामदगी के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की गई है और जोन स्तर पर नियमित समीक्षा की जा रही है।


हाईकोर्ट का सख्त संदेश

हाईकोर्ट ने कहा कि 34 बच्चियों का पता न चल पाना चिंता का विषय है, लेकिन पुलिस के सतत प्रयासों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि बच्चियों की सुरक्षा और उनके परिवारों की चिंता सर्वोपरि है।


अदालत ने कहा कि यदि पुलिस या संबंधित अधिकारियों की लापरवाही पाई जाती है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने लखनऊ पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वे 3 जुलाई तक इन मामलों की प्रगति रिपोर्ट और शपथ पत्र दाखिल करें।