लखनऊ में नाबालिग लड़कियों के अपहरण पर हाई कोर्ट का सख्त रुख
लखनऊ में नाबालिग लड़कियों के लापता होने के मामले
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नाबालिग लड़कियों के लापता होने और अपहरण की घटनाओं में वृद्धि पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को इन मामलों की प्रभावी और समयबद्ध निगरानी सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं।
न्यायालय ने पुलिस उपायुक्त (पूर्वी) को तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है और उनके अधिकार क्षेत्र के सभी थाना प्रभारियों, सर्किल अधिकारियों और जांच अधिकारियों को अगली सुनवाई पर अदालत में उपस्थित रहने के लिए कहा है।
अगली सुनवाई और पुलिस की जवाबदेही
इस मामले की अगली सुनवाई 10 जून को होगी। न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने लखनऊ पुलिस आयुक्त से शहर के विभिन्न थानों में इसी प्रकार की घटनाओं के बारे में स्पष्टीकरण मांगा। अदालत ने कहा कि नाबालिग लड़कियों के जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में पुलिस को अधिक सतर्कता और जवाबदेही के साथ कार्य करना चाहिए।
पुलिस उपायुक्त का हलफनामा
सुनवाई के दौरान, पुलिस उपायुक्त ने एक व्यक्तिगत हलफनामा पेश करते हुए बताया कि उनके पर्यवेक्षण में नौ थानों से 81 महिलाओं और लड़कियों के अपहरण या बहला-फुसलाकर ले जाने के मामले सामने आए हैं। इनमें से 66 को बरामद कर लिया गया है, जबकि 15 लड़कियां अभी भी लापता हैं।
अदालत ने डीसीपी को ऐसे मामलों की पहचान करने का निर्देश दिया जो पुलिस को रिपोर्ट नहीं किए गए हैं और उन पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। साथ ही, अदालत ने निर्देश दिया कि जहां आवश्यक हो, सक्षम अधिकारियों की तैनाती की जाए ताकि थाना प्रभारी, चौकी प्रभारी और जांच अधिकारी इन मामलों को गंभीरता से लें।
बीबीडी थाने की लापरवाही पर अदालत की नाराजगी
हाई कोर्ट ने बीबीडी थाना क्षेत्र से पिछले चार महीनों से लापता एक 12 वर्षीय लड़की के मामले में कड़े निर्देश दिए। अदालत के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने लड़की को बरामद कर कोर्ट में पेश किया। पूछताछ के दौरान बच्ची ने अपने पिता के साथ जाने की इच्छा जताई, जिसके बाद न्यायालय ने उसकी अभिरक्षा पिता को सौंप दी।
अदालत ने इस मामले में लापरवाही बरतने वाले उपनिरीक्षक अश्वनी कुमार राय की कार्यशैली पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी ने न तो उचित प्रक्रिया का पालन किया और न ही बच्ची को ढूंढने के लिए समय पर पर्याप्त प्रयास किए।
भविष्य के लिए निर्देश
अदालत ने आदेश दिया है कि थानों और चौकियों पर सक्षम अधिकारियों की तैनाती की जाए ताकि भविष्य में ऐसे संवेदनशील मामलों को पूरी गंभीरता से निपटाया जा सके।