रूस का नया महादानव: समुद्र में शक्ति का प्रदर्शन
रूस का नया युद्धपोत, जो 30 वर्षों के बाद समुद्र में उतरा है, ने नाटो और अमेरिका की सेनाओं में हलचल मचा दी है। इस विशाल युद्धपोत की विशेषताएँ इसे दुश्मनों के लिए एक गंभीर खतरा बनाती हैं। इसके पास अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम और शक्तिशाली एयर डिफेंस क्षमताएँ हैं। हालांकि, रूस को इस दैत्य को सक्रिय करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। जानिए इस युद्धपोत की खासियतें और रूस की वर्तमान स्थिति के बारे में।
Jun 5, 2026, 15:42 IST
रूस का शक्तिशाली युद्धपोत
रूस का नया युद्धपोत, जो 30 वर्षों के बाद समुद्र में उतरा है, ने नाटो और अमेरिका की सेनाओं में हलचल मचा दी है। यह विशाल युद्धपोत किसी भी देश के नौसैनिक बेड़े को नष्ट करने की क्षमता रखता है। इसकी उपस्थिति से दुश्मन के जहाजों को बचने का केवल एक सेकंड का समय मिलेगा। अगस्त 2025 में, इसने अपनी ताकत से समुद्र की लहरों को चीरना शुरू किया और अब 2026 में यह अपनी अंतिम परीक्षा के लिए तैयार है।
किरो क्लास क्रूज़र की विशेषताएँ
किरो क्लास क्रूज़र एक अद्वितीय युद्धपोत है, जिसका वजन लगभग 28,000 टन है। यह अमेरिका के तीन आधुनिक अर्ली बर्ग क्लास डिस्ट्रॉयर्स से भी बड़ा है। इस न्यूक्लियर प्लांट से चलने वाले युद्धपोत में 176 मिसाइल लॉन्च सेल्स हैं, जिनमें से लगभग 100 सेल्स में रूस का शक्तिशाली S400 एयर डिफेंस सिस्टम तैनात है। इसके अलावा, इसमें ज़रकॉन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें भी हैं, जो ध्वनि की गति से नौ गुना तेज़ उड़ती हैं।
रूस की चुनौतियाँ
हालांकि, इस दैत्य को सक्रिय करना रूस के लिए आसान नहीं था। यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध के कारण लगे प्रतिबंधों और बजट संकट ने रूस को इसके जुड़वां जहाज पियोत्र वेलिकी को समय से पहले रिटायर करने के लिए मजबूर किया। सोवियत संघ के टूटने के बाद से रूस ने कोई नया बड़ा युद्धपोत नहीं बनाया, इसलिए उसने अपनी पूरी ताकत एडमिरल नाखिमो को चमकाने में लगा दी है। अमेरिका और नाटो देश लगातार आर्कटिक क्षेत्र में रूस के व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहे हैं।