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रूस और भारत की मजबूत दोस्ती: अमेरिका के विदेश मंत्री की यात्रा के बीच महत्वपूर्ण घोषणाएं

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। इस दौरान रूस ने भारत के लिए कच्चे तेल और गैस सप्लाई में कोई कमी नहीं लाने का आश्वासन दिया है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं, जो अमेरिका के साथ हालिया डील के बावजूद जारी रहेंगी। जानिए इस यात्रा के दौरान और क्या-क्या मुद्दे उठाए गए।
 

अमेरिका के विदेश मंत्री की भारत यात्रा का प्रभाव


जब अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत पहुंचे, तो इससे चीन, ईरान और कई यूरोपीय देशों में हलचल मच गई। ईरान ने इस यात्रा पर तंज कसा, जबकि रूस ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है, जिसने अमेरिका को भी चौंका दिया है। रूस और भारत की मित्रता का एक और उदाहरण हाल ही में देखने को मिला है, खासकर ऊर्जा संकट के समय। जब पूरी दुनिया में तेल की कमी हो रही है, रूस भारत के साथ मजबूती से खड़ा है। अमेरिका और भारत के बीच हालिया डील के बावजूद, रूस ने स्पष्ट किया है कि भारत को अपने फैसले लेने की स्वतंत्रता है। रूस के विदेश मंत्री ने हाल ही में कहा था कि वे भारत को तेल, गैस और कोयले की आपूर्ति में कोई कमी नहीं आने देंगे।


रूस का भारत के लिए बड़ा ऐलान

रूस के डिप्टी चीफ मिशन रोमन ने बताया कि रूस भारत के लिए कच्चे तेल का विश्वसनीय सप्लायर बना हुआ है। दोनों देश अब भारतीय शहरों में गैस सप्लाई के लिए सीएनजी फिलिंग स्टेशनों के विस्तार और नई तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल सुविधाओं की खोज कर रहे हैं। यह जानकारी पश्चिम एशिया संकट के चलते ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए महत्वपूर्ण है। रूस भारत को कच्चे तेल का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है, और दोनों देशों के बीच यह सहयोग आगे भी जारी रहने की संभावना है। अमेरिका ने भारत को रूसी तेल के निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में छूट दी है, जिससे दोनों देशों के बीच बातचीत और बढ़ी है।


अमेरिका के विदेश मंत्री की यात्रा के दौरान चर्चा के मुद्दे

मार्को रुबियो की भारत यात्रा के पहले दिन, पीएम मोदी और उन्होंने सुरक्षा, मध्य पूर्व संकट, व्यापार, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रुबियो के बीच द्विपक्षीय वार्ता में भी कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं। जयशंकर ने भारतीय यात्रियों को अमेरिकी वीजा मिलने में आ रही चुनौतियों को उठाया, जिसके जवाब में रुबियो ने भारतीयों के अमेरिकी अर्थव्यवस्था में योगदान को स्वीकार किया।