रीठा: बवासीर और अन्य रोगों के लिए प्रभावी औषिधि
रीठा, जिसे अरीठा भी कहा जाता है, एक प्राकृतिक औषिधि है जो बवासीर और अन्य कई रोगों के उपचार में सहायक है। इस लेख में, हम रीठा के औषधीय गुणों, इसे बनाने की विधि, सेवन के तरीके और इसके अद्भुत फायदों के बारे में विस्तार से जानेंगे। यह नुस्खा 90 प्रतिशत मरीजों पर सफल साबित हुआ है। जानें कैसे आप इस प्राकृतिक उपचार का लाभ उठा सकते हैं।
May 7, 2026, 14:28 IST
रीठा के औषधीय गुण
- यह नुस्खा एक महात्मा से प्राप्त हुआ है और 100 में से 90 मरीजों पर प्रयोग करने पर यह 90 प्रतिशत सफल रहा है। आइए जानते हैं इस नुस्खे के बारे में।
औषिधि बनाने की विधि
- रीठा के फल से बीज निकालकर शेष भाग को लोहे की कढ़ाई में डालें और तब तक गर्म करें जब तक वह कोयला न बन जाए। फिर इसे आंच से उतारकर समान मात्रा में पपड़िया कत्था मिलाकर छान लें। आपकी औषिधि तैयार है।
औषिधि का सेवन कैसे करें
सेवन विधि:
- इस औषिधि की एक रत्ती (125 मिलीग्राम) को मक्खन या मलाई के साथ सुबह-शाम सेवन करें। यह प्रक्रिया सात दिन तक जारी रखें।
- सात दिन के सेवन से कब्ज, बवासीर की खुजली और खून बहने की समस्या में राहत मिलती है।
- यदि आप इस रोग से स्थायी छुटकारा पाना चाहते हैं, तो हर छह महीने में यह कोर्स दोहराएं।
रीठा के अन्य नाम
अन्य नाम:
- संस्कृत - अरिष्ट, रक्तबीज, मागल्य
- हिन्दी - रीठा, अरीठा
- गुजराती - अरीठा
- मराठी - रीठा
- मारवाड़ी - अरीठो
- पंजाबी - रेठा
- कर्नाटक - कुकुटेकायि
सेवन के दौरान परहेज़
परहेज़:
- सेवन के दौरान नमक का सेवन न करें। आयुर्वेद में पथ्य का विशेष ध्यान रखा जाता है।
सेवन के दौरान क्या खाएं और क्या न खाएं
क्या खाएं:
- मुंग या चने की दाल, कुल्थी की दाल, पुराने चावल, बथुआ, करेला, कच्चा पपीता, गुड़, दूध, घी, मक्खन, काला नमक, सरसों का तेल आदि।
क्या न खाएं:
- उड़द, धी, सेम, भारी और भुने पदार्थ, धूप या ताप से बचें।
रीठा के अद्भुत फायदे
फायदे:
- बवासीर में राहत: रीठा के पीसे हुए छिलके को दूध में मिलाकर गोलियां बनाएं।
- संग्रहणी: 4 ग्राम रीठा को 250 मिलीलीटर पानी में डालकर गर्म करें।
- गठिया: रीठा का लेप करने से दर्द में राहत मिलती है।