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रिलायंस इंडस्ट्रीज का ग्रीन एनर्जी में बड़ा कदम: बैटरी फैक्ट्री अंतिम चरण में

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिसमें उनकी बैटरी फैक्ट्री अब अंतिम चरण में है। जामनगर में स्थित इस ग्रीन एनर्जी कॉम्प्लेक्स का निर्माण तेजी से हो रहा है, और 2026 में लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरियों का उत्पादन शुरू होगा। कंपनी का लक्ष्य 2032 तक हर साल 30 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है। इसके अलावा, कच्छ में एक विशाल रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट भी तैयार हो रहा है, जो सस्ती बिजली का स्रोत बनेगा।
 

रिलायंस का क्लीन एनर्जी में नया अध्याय

भारत के कॉरपोरेट क्षेत्र में जब भी कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन होता है, रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) हमेशा सबसे आगे होती है। टेलीकॉम और रिटेल में अपनी मजबूत स्थिति के बाद, अब कंपनी की नजर क्लीन एनर्जी के क्षेत्र पर है। हाल ही में जारी की गई कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट (FY26) यह दर्शाती है कि रिलायंस का अगला बड़ा निवेश ग्रीन एनर्जी, बैटरी निर्माण, ग्रीन हाइड्रोजन और बड़े रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स में होगा। इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि रिलायंस की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) गीगा फैक्ट्री अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, जो देश में ऊर्जा के उपयोग के तरीके को बदलने वाली है.


जामनगर: ऊर्जा का नया केंद्र

रिलायंस का जामनगर में स्थित ग्रीन एनर्जी कॉम्प्लेक्स तेजी से विकसित हो रहा है। इस इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम के तहत बैटरी प्रोजेक्ट का निर्माण जल्द ही पूरा होने वाला है। योजना के अनुसार, 2026 की दूसरी छमाही से लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) आधारित बैटरियों का उत्पादन बड़े पैमाने पर शुरू होगा। प्रारंभिक क्षमता 40 गीगावॉट आवर (GWh) होगी, जिसे भविष्य की मांग को देखते हुए 100 GWh तक बढ़ाने का लक्ष्य है। सोलर पैनल से लेकर नए ग्रीन फ्यूल तक, सभी पहलू इस महाप्रोजेक्ट का हिस्सा हैं, जिससे भारत की ऊर्जा में विदेशी निर्भरता कम होगी.


ग्रीन हाइड्रोजन का महत्व

कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन आवश्यक है। रिलायंस ने इस दिशा में एक स्पष्ट टाइमलाइन निर्धारित की है। कंपनी का लक्ष्य है कि 2032 तक हर साल 30 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाए। इसके अलावा, दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग C&T के साथ 15 साल का एक महत्वपूर्ण करार भी हुआ है, जिसके तहत वित्त वर्ष 2029 (FY29) की दूसरी छमाही से ग्रीन अमोनिया की सप्लाई शुरू की जाएगी। यह भारतीय कंपनियों द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा लॉन्ग-टर्म सप्लाई एग्रीमेंट है, जिसका उपयोग रिफाइनिंग, फर्टिलाइजर, शिपिंग और भारी उद्योगों में किया जाएगा.


कच्छ में सस्ती बिजली का प्रोजेक्ट

बिना बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन के इस क्लीन एनर्जी सपने को साकार करना संभव नहीं है। इसके लिए गुजरात के कच्छ में 5.5 लाख एकड़ में एक विशाल रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट तैयार हो रहा है। उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 (FY27) तक यहां से बिजली उत्पादन शुरू होगा। यह सस्ती और रिन्यूएबल बिजली ग्रीन हाइड्रोजन बनाने की लागत को काफी कम कर देगी। इसके अलावा, रिलायंस अपने सोलर मैन्युफैक्चरिंग कारोबार को 10 GWp से बढ़ाकर 20 GWp सालाना करने की योजना बना रही है। आंध्र प्रदेश में 6 GWp का एक नया सोलर पावर प्रोजेक्ट भी विकसित किया जा रहा है.