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राहुल गांधी ने सीबीआई निदेशक चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल, बैठक से निकले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सीबीआई निदेशक के चयन पर हुई बैठक में राहुल गांधी ने केवल पांच मिनट में बाहर निकलकर असहमति जताई। उन्होंने चयन प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण बताते हुए गंभीर आरोप लगाए। राहुल ने कहा कि सीबीआई का उपयोग राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने सरकार पर महत्वपूर्ण सूचनाएं रोकने का आरोप लगाया और कहा कि वह इस पूर्व निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन सकते। इस विवाद ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।
 

सीबीआई निदेशक चयन पर विवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई उच्च स्तरीय बैठक में सीबीआई के नए निदेशक के चयन पर चर्चा हुई। इस बैठक से विपक्ष के नेता राहुल गांधी केवल पांच मिनट में बाहर निकल गए। बैठक छोड़ने से पहले उन्होंने प्रधानमंत्री को एक दो पन्नों का असहमति पत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने चयन प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण करार दिया और कहा कि वह इस पूर्व निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन सकते।


बैठक में शामिल अन्य सदस्य

यह बैठक प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित की गई थी, जिसमें भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत भी शामिल थे। सीबीआई के वर्तमान निदेशक प्रवीण सूद का कार्यकाल 24 मई 2026 को समाप्त हो रहा है, इसलिए नए निदेशक के चयन के लिए यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही थी।


राहुल गांधी के आरोप

बैठक के दौरान, राहुल गांधी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सीबीआई जैसी प्रमुख जांच एजेंसी का उपयोग राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और आलोचकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता को चयन समिति में शामिल किया गया था, लेकिन उन्हें इस प्रक्रिया में कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं दी गई।


असहमति पत्र में उठाए गए मुद्दे

राहुल गांधी ने अपने असहमति पत्र में लिखा कि उन्होंने कई बार योग्य उम्मीदवारों की मूल्यांकन रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन सरकार ने उन्हें उपलब्ध नहीं कराया। उन्होंने कहा कि बैठक में उन्हें उनहत्तर उम्मीदवारों के मूल्यांकन अभिलेख देखने के लिए दिए गए, जबकि 360 डिग्री रिपोर्ट पूरी तरह से रोक दी गई।


सरकार की प्रतिक्रिया

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना किसी कानूनी आधार के महत्वपूर्ण सूचनाएं रोककर चयन प्रक्रिया को मजाक बना दिया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का नेता केवल औपचारिक मुहर लगाने वाला नहीं है और वह अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकते।


बैठक का निष्कर्ष

सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा में हिस्सा नहीं लिया, जिसके कारण बैठक केवल पांच मिनट में समाप्त हो गई। इसके बाद लगभग पैंतीस मिनट तक अन्य अंतरराष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई।


सोशल मीडिया पर विरोध

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भी अपने विरोध को सार्वजनिक किया, यह कहते हुए कि वह किसी पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन सकते। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले भी उन्होंने असहमति दर्ज कराई थी, लेकिन सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया।


चयन प्रक्रिया की स्थिति

सरकार की ओर से अभी तक राहुल गांधी के आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि चयन प्रक्रिया नियमानुसार चल रही है और समिति योग्य अधिकारियों के नामों पर विचार कर रही है।


राजनीतिक माहौल पर प्रभाव

सीबीआई देश की प्रमुख जांच एजेंसियों में से एक मानी जाती है, और उसके निदेशक की नियुक्ति हमेशा संवेदनशील होती है। इस चयन प्रक्रिया पर उठे विवाद ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। राहुल गांधी का तीखा विरोध और बैठक से बाहर निकलने की घटना ने इस नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर नए विवाद खड़े कर दिए हैं।