राहुल गांधी ने सीएपीएफ कर्मियों के अधिकारों की रक्षा की मांग की
कांग्रेस नेता का सरकार पर आरोप
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के प्रति भेदभाव को कानूनी रूप से लागू करने का आरोप सरकार पर लगाया है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो वह इस 'भेदभावपूर्ण कानून' को समाप्त कर देगी। गांधी ने यह भी कहा कि सीएपीएफ के कर्मियों को वही नेतृत्व के अवसर मिलने चाहिए जो पहले आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित थे।
अजय मलिक का मामला
एक वीडियो बयान में, गांधी ने सहायक कमांडेंट अजय मलिक का उल्लेख किया, जो सेवा के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए थे। मलिक के बलिदान के बावजूद, गांधी ने सीएपीएफ कर्मियों की पदोन्नति में व्यवस्थित रूप से वंचित किए जाने का मुद्दा उठाया, जिसमें शीर्ष पद अक्सर आईपीएस अधिकारियों को दिए जाते हैं, जिससे संस्थागत अन्याय उत्पन्न होता है। उन्होंने कहा कि उन्होंने बुधवार को सरकार से अनुरोध किया था कि वह इस विधेयक पर सदन में बोलना चाहते हैं, लेकिन सरकार ने उनकी बात नहीं मानी। लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा बृहस्पतिवार को होगी।
राज्यसभा में विधेयक का पारित होना
राज्यसभा ने बुधवार को इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि इस कानून के लागू होने के बाद इन बलों का प्रबंधन बेहतर होगा और कार्यकुशलता में वृद्धि होगी। राहुल गांधी ने हाल ही में सीआरपीएफ के एक घायल जवान से मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक ने नक्सली मुठभेड़ में अपना एक पैर खो दिया और देश की रक्षा में सब कुछ दांव पर लगा दिया।
सीएपीएफ जवानों के अधिकारों की रक्षा
कांग्रेस नेता ने कहा कि ये जवान सीमाओं पर तैनात रहते हैं और आतंकवाद तथा नक्सलवाद से लड़ते हैं, लेकिन जब उनके अधिकारों की बात आती है, तो व्यवस्था मुंह फेर लेती है। उन्होंने यह भी कहा कि सीएपीएफ के जवान इस भेदभाव के खिलाफ हैं और उच्चतम न्यायालय ने भी इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने कहा कि यह विधेयक केवल एक करियर को अवरुद्ध करने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह उन लोगों का मनोबल तोड़ने की कोशिश है जो देश की पहली रक्षा पंक्ति हैं।
कांग्रेस का वादा
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का स्पष्ट वादा है कि उनकी सरकार आने पर इस भेदभावपूर्ण कानून को समाप्त किया जाएगा, क्योंकि जो लोग देश के लिए लड़ते हैं, उन्हें नेतृत्व का अधिकार मिलना चाहिए।