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राहुल गांधी ने INDIA गठबंधन की रैली में चुनावी धांधली के आरोप लगाए

दिल्ली में आयोजित INDIA गठबंधन की महारैली में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में चुनावों में वोटों की धांधली हुई है और 2024 के आम चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। राहुल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाने पर लेते हुए कहा कि उन्हें पद से हटाया जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने देश के आर्थिक हालात और संसाधनों के केंद्रीकरण पर भी चिंता जताई।
 

दिल्ली में INDIA गठबंधन की महारैली


नई दिल्ली। राजधानी के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित INDIA गठबंधन की विशाल महारैली में बोलते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और भारतीय चुनाव आयोग पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में चुनावों में वोटों की धांधली और चोरी की घटनाएं बढ़ी हैं।


राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और कर्नाटक के विधानसभा चुनावों के साथ-साथ 2024 के आम चुनावों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इन चुनावों के परिणामों में हेरफेरी की गई है।


मंच से बोलते हुए राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से कहा कि उनकी कही बातें हमेशा सच साबित होती हैं और उन्होंने विश्वास दिलाया कि ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाया जाएगा और उन्हें जेल की सजा मिलेगी।


राहुल ने यह भी कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार की भूमिका न होती, तो नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री और अमित शाह गृह मंत्री नहीं बन पाते।


2024 के आम चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने बताया कि चुनाव के बाद लगभग 15 प्रतिशत वोटरों के नाम मतदाता सूचियों से हटा दिए गए हैं। उन्होंने इसे 'वोट चोरी' करार देते हुए 2024 के चुनाव को गैर-कानूनी बताया।


राहुल गांधी ने सरकार पर देश के आर्थिक हालात और संसाधनों के केंद्रीकरण को लेकर भी हमला किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान शिव की बारात में सभी का स्वागत होता है, और वे एक समावेशी भारत बनाना चाहते हैं।


उन्होंने कहा कि आज का किसान मेहनत करने के बावजूद अपने अधिकारों से वंचित है, और 18-18 घंटे पढ़ाई करने वाले युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में देश की संपत्ति केवल कुछ बड़े उद्योगपतियों के हाथों में सिमट गई है।