राहुल गांधी के मनुस्मृति बयान पर सियासी विवाद तेज
राहुल गांधी के बयान से शुरू हुआ विवाद
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मनुस्मृति पर दिए गए बयान ने देश की राजनीति में एक बार फिर से गरमा-गर्मी पैदा कर दी है। यह विवाद महिलाओं के अधिकारों और स्वतंत्रता पर उनकी टिप्पणी से शुरू हुआ, जिसके बाद बीजेपी, कांग्रेस और धार्मिक नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी हुई। पुणे में 22 अगस्त को आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में, राहुल गांधी ने महिलाओं की स्थिति पर चर्चा करते हुए मनुस्मृति का उल्लेख किया।
राहुल गांधी का बयान
राहुल गांधी ने महिलाओं के अधिकारों पर बात करते हुए मनुस्मृति में महिलाओं को पुरुषों के अधीन रखने के विचार का जिक्र किया। उन्होंने इसे महिलाओं की स्वतंत्रता के खिलाफ बताते हुए कहा कि महिलाएं किसी पुरुष की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि उनकी अपनी पहचान है। इसके साथ ही, उन्होंने महिलाओं से पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की।
बीजेपी का पलटवार
राहुल गांधी के इस बयान के बाद बीजेपी ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना लिया। पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता हिंदू धार्मिक परंपराओं और ग्रंथों को निशाना बना रहे हैं। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने भी राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मनुस्मृति के कुछ श्लोकों का हवाला दिया और उन्हें ग्रंथ को पढ़ने की सलाह दी।
शंकराचार्य की आपत्ति
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राहुल गांधी की मनुस्मृति संबंधी टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उनके बयान के बाद बीजेपी ने राहुल गांधी की आलोचना को राजनीतिक समर्थन दिया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के बयान को संदर्भ से बाहर पेश किया गया।
चुनावी हिंदू का आरोप
विवाद बढ़ने के साथ बीजेपी समर्थकों ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर 'चुनावी हिंदू' जैसे राजनीतिक तंज किए। कांग्रेस समर्थक इसे बीजेपी की ओर से मुद्दे को धार्मिक रंग देने की कोशिश बता रहे हैं। दोनों पक्षों की राजनीतिक व्याख्या एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न है।
योगी आदित्यनाथ का बयान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस विवाद में अपनी राय दी। उन्होंने राहुल गांधी की टिप्पणी को भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के खिलाफ बताते हुए उन्हें वेदों और भारतीय परंपराओं को समझने की सलाह दी।
मनुस्मृति बनाम संविधान
मनुस्मृति को लेकर भारतीय राजनीति में विवाद नया नहीं है। राहुल गांधी ने पहले भी संसद में संविधान के संदर्भ में मनुस्मृति का उल्लेख किया है। इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस लंबे समय से चल रही है।
विवाद का वर्तमान परिप्रेक्ष्य
वर्तमान में, कांग्रेस राहुल गांधी की टिप्पणी को महिलाओं की स्वतंत्रता और पितृसत्ता के खिलाफ एक राजनीतिक संदेश के रूप में पेश कर रही है, जबकि बीजेपी इसे हिंदू धार्मिक परंपराओं पर हमले के रूप में देख रही है। मनुस्मृति का मुद्दा एक बार फिर से राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।