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राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन में विकसित भारत के लक्ष्य पर चर्चा

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन में 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक नीतियों पर चर्चा की। हरियाणा विधानसभा द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों की भागीदारी होगी। सम्मेलन का उद्देश्य संसदीय सहयोग को मजबूत करना और 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए रणनीतियों पर विचार करना है। जानें इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के बारे में और अधिक।
 

राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन का उद्घाटन

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को बताया कि आगामी राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) सम्मेलन में 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक नीतियों पर विचार किया जाएगा। यह सम्मेलन हरियाणा विधानसभा द्वारा आयोजित तीन दिवसीय द्वितीय सीपीए भारत क्षेत्र, जोन-दो सम्मेलन का हिस्सा है, जिसका उद्घाटन बिरला करेंगे।


सम्मेलन की चर्चा और प्रतिभागी

चंडीगढ़ में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, 'हम नीतियों के माध्यम से विकसित भारत के संकल्प को कैसे साकार कर सकते हैं, इस पर चर्चा की जाएगी।' सम्मेलन में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली की विधानसभाओं के अध्यक्ष, विधायक, विधान परिषदों के सभापति, उप सभापति और सदस्य शामिल होंगे।


प्रतिभागी 'भविष्य की चुनौतियों और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में जागरूक समाज और जनप्रतिनिधियों की भूमिका' पर विचार करेंगे। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविंदर कल्याण और राज्य के संसदीय कार्य मंत्री महिपाल ढांडा भी सम्मेलन में अपने विचार साझा करेंगे।


सम्मेलन का समापन और उद्देश्य

सम्मेलन का समापन नौ जून को होगा, जिसमें हरियाणा के राज्यपाल आशिम कुमार घोष समापन भाषण देंगे। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस सम्मेलन का उद्देश्य संसदीय सहयोग को मजबूत करना, विधायी और संसदीय कार्यप्रणाली से जुड़े सर्वोत्तम अनुभवों का आदान-प्रदान करना और क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देना है।


बयान में यह भी कहा गया है कि यह सम्मेलन पीठासीन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अपने अनुभव साझा करने और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए रणनीतियों पर चर्चा करने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा।