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रायबरेली में सड़क निर्माण को लेकर राजनीतिक विवाद

रायबरेली में एक सड़क के निर्माण को लेकर राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया है, जब एक ही सड़क का भूमिपूजन महज 12 घंटे के भीतर दो बार किया गया। सदर विधायक और नगर पालिका अध्यक्ष के बीच श्रेय लेने की होड़ ने स्थानीय लोगों की समस्याओं को उजागर किया है। हालांकि, स्थानीय निवासियों को उम्मीद है कि यह सड़क जल्द ही बनकर तैयार होगी, जिससे उनकी वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान होगा।
 

सड़क निर्माण का भूमिपूजन विवाद

रायबरेली में एक सड़क को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि एक ही सड़क का भूमिपूजन महज 12 घंटे के भीतर दो बार किया गया। इस सड़क के निर्माण का श्रेय लेने के लिए दो जनप्रतिनिधि आमने-सामने आ गए हैं। हालांकि, इस राजनीतिक खींचतान के बीच स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं के लिए राहत की खबर है, जो लंबे समय से जर्जर सड़क की समस्या का सामना कर रहे थे।


एक सड़क, 12 घंटे और दो बार भूमिपूजन… रायबरेली में श्रेय लेने की ये कैसी होड़?


आईटीआई मोड़ से प्राचीन अभयदाता मंदिर को जोड़ने वाली यह सड़क लंबे समय से खराब स्थिति में थी। सड़क पर गहरे गड्ढे होने के कारण स्थानीय लोगों और मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु गुजरते हैं।


सड़क निर्माण का मामला तब चर्चा में आया जब सदर विधायक अदिति सिंह ने पहले भूमिपूजन किया, और उसके बाद नगर पालिका अध्यक्ष शत्रोहन सोनकर ने भी उसी सड़क का भूमिपूजन कर दिया। इसके बाद राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।


स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क की उपेक्षा तब खत्म हुई जब समाजसेवी विवेक मिश्रा उर्फ पल्लू ने सड़क के गड्ढों में मलबा डालने और मार्ग पर रोशनी के लिए 15 स्ट्रीट लाइटें लगाने का काम किया। इसके बाद सड़क निर्माण की प्रक्रिया में तेजी आई।



हालांकि, भूमिपूजन को लेकर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा चर्चा का विषय बनी हुई है, लेकिन आम जनता का कहना है कि उन्हें राजनीति से ज्यादा सड़क निर्माण की चिंता है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही यह सड़क बनकर तैयार होगी और उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होगा।