राम रहीम को बार-बार पैरोल मिलने का रहस्य: हरियाणा का नया कानून
राम रहीम की पैरोल का मामला
हरियाणा के 2022 के कानून और हार्डकोर कैदी की परिभाषा ने राम रहीम को बार-बार पैरोल मिलने का अवसर प्रदान किया है। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को साध्वी यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन वह अब तक लगभग 16 बार जेल से बाहर आ चुके हैं और 400 से अधिक दिन जेल के बाहर बिता चुके हैं। यह सवाल उठता है कि गंभीर अपराधों में दोषी होने के बावजूद उन्हें इतनी राहत कैसे मिलती है। इसका मुख्य कारण हरियाणा सरकार द्वारा 2022 में लागू किया गया 'हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स (टेम्पररी रिलीज) एक्ट' है।
हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स (टेम्पररी रिलीज) एक्ट क्या है?
इस कानून के तहत 'हार्डकोर दोषी कैदी' की परिभाषा दी गई है। ऐसे कैदियों को हार्डकोर माना जाएगा जो गंभीर अपराधों जैसे सीरियल किलिंग, सामूहिक बलात्कार, और नाबालिगों के साथ यौन अपराध में दोषी ठहराए गए हों।
राम रहीम हार्डकोर कैदी क्यों नहीं हैं?
हरियाणा सरकार ने 2022 में एडवोकेट जनरल से कानूनी राय ली, जिसमें कहा गया कि राम रहीम हार्डकोर दोषी कैदी की श्रेणी में नहीं आते। इसका कारण IPC की धारा 302 और 120-B की व्याख्या है।
नए कानून की तुलना पुराने कानून से
1988 के पुराने कानून में पैरोल के लिए सख्त शर्तें थीं, जबकि 2022 में लाए गए नए कानून में पैरोल की श्रेणियों को विस्तारित किया गया है। नए कानून के तहत, एक कैदी को साल में 10 हफ्ते तक पैरोल और 3 हफ्ते तक फरलो मिल सकती है।
राम रहीम को मिली पैरोल और फरलो
राम रहीम को अक्टूबर 2020 में पहली बार पैरोल मिली, और उसके बाद से कई बार उन्हें पैरोल और फरलो दी गई। जनवरी 2024 में उन्हें 50 दिन की पैरोल मिली, जो सबसे लंबी थी।
राम रहीम की पैरोल पर विवाद
राम रहीम की रिहाई अक्सर राजनीतिक बहस का विषय बन जाती है। विपक्षी दल आरोप लगाते हैं कि चुनावी मौसम में उन्हें राहत दी जाती है।
राम रहीम की सजा
राम रहीम फिलहाल साध्वी यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा काट रहे हैं और अन्य मामलों में भी उन्हें दोषी ठहराया गया है।