राम मंदिर दान गबन की जांच में एसआईटी ने उच्चतम न्यायालय को सौंपा अंतरिम रिपोर्ट
अयोध्या में राम मंदिर के दान में कथित गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने उच्चतम न्यायालय को अपनी अंतरिम रिपोर्ट पेश करने की योजना बनाई है। इस रिपोर्ट में दान से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के निष्कर्ष शामिल होंगे। एसआईटी ने राज्य सरकार से अतिरिक्त समय मांगा है, जबकि उच्चतम न्यायालय ने गबन की निष्पक्ष जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की है। जानें इस मामले में क्या नया हो रहा है और एसआईटी की रिपोर्ट में क्या सिफारिशें की जा सकती हैं।
Jul 17, 2026, 16:12 IST
राम मंदिर दान गबन की जांच का नया मोड़
अयोध्या में राम मंदिर के दान में कथित गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) सोमवार को उच्चतम न्यायालय को अपनी अंतरिम रिपोर्ट पेश कर सकती है। सूत्रों के अनुसार, यह कदम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में उठाया जा रहा है। एसआईटी ने राज्य सरकार से दान से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं की जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। यह घटनाक्रम उच्चतम न्यायालय द्वारा गबन की निष्पक्ष जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के कुछ दिन बाद सामने आया है, जिसमें एसआईटी को स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था।
तीन सदस्यीय एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल हैं। इसे 13 जून को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित किया गया था। प्रारंभ में, टीम को जांच पूरी करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 15 दिन और किया गया।
एसआईटी द्वारा 23 जून को राज्य सरकार को सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसमें आठ आरोपियों की गिरफ्तारी और मंदिर के दान से निकाली गई नकदी की बरामदगी शामिल है। इसके अलावा, पूर्व ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दिया।
अंतिम रिपोर्ट में मंदिर प्रशासन और दान-गणना प्रणाली में सुधार की सिफारिश की उम्मीद है। ट्रस्ट 22 जुलाई को अयोध्या में बैठक करेगा, जिसमें निष्कर्षों और संभावित सुधारात्मक उपायों पर चर्चा की जाएगी।
उच्चतम न्यायालय उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें सीबीआई जांच, फॉरेंसिक ऑडिट और ट्रस्ट के वित्तीय मामलों का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से ऑडिट कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने एसआईटी द्वारा जांच शुरू करने के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं और गबन की समयबद्ध जांच की मांग की है।