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राम मंदिर ट्रस्ट में इस्तीफे और जांच की नई घटनाएँ

अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। यह निर्णय SIT द्वारा जांच के बीच लिया गया है, जिसमें राय के करीबी सहयोगियों की गिरफ्तारी भी शामिल है। बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष ने चोरी की घटना पर दुख व्यक्त किया और दोषियों को सजा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। SIT ने मामले की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण सबूत भी जुटाए हैं।
 

राम मंदिर ट्रस्ट में इस्तीफे की स्वीकृति

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर के लिए दान में हेराफेरी के आरोपों के चलते, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। यह निर्णय तब लिया गया जब ट्रस्ट ने मंदिर परिसर के गेस्ट हाउस में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की और योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की जांच पर भरोसा जताया। चंपत राय इस विवाद में मुख्य रूप से शामिल रहे हैं, और उनके सहयोगी रामाशंकर उर्फ टिन्नू यादव उन आठ लोगों में से एक हैं जिन्हें SIT ने गिरफ्तार किया है। SIT और अयोध्या पुलिस ने राय और मिश्रा से पूछताछ की है, लेकिन अभी तक उनके खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।


सोमवार को ट्रस्ट की बैठक में अधिकांश सदस्य शामिल हुए, जिनमें 89 वर्षीय चेयरमैन नृत्य गोपाल दास भी शामिल थे। हालांकि, राय और मिश्रा ने बैठक में शामिल न होने का निर्णय लिया क्योंकि इसमें उनके इस्तीफे पर चर्चा होनी थी।


बैठक में उठे गंभीर मुद्दे

बैठक से कुछ घंटे पहले, दास ने कहा कि उन्हें कथित चोरी से 'बहुत दुख' हुआ है और उन्होंने दोषियों को सजा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए और विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उचित कार्रवाई करेंगे। दास ने कहा, "श्री राम ललाजी के मंदिर में हुई चोरी से मुझे बहुत दुख हुआ है। जिसने भी यह पाप किया है, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।"


इस बीच, SIT और अयोध्या पुलिस मामले की जांच कर रही हैं और उन्होंने गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों के घरों से नकद राशि बरामद की है। अधिकारियों ने डिलीट किया गया CCTV फुटेज भी बरामद किया है, जिसमें आरोपी मंदिर परिसर से बाहर निकलते समय नोट छिपाते हुए दिखाई दे रहे हैं।


SIT की जांच और ट्रस्ट की पारदर्शिता

SIT पिछले पांच वर्षों में ट्रस्ट की आर्थिक गतिविधियों की ऑडिट रिपोर्ट की जांच करने पर विचार कर रही है। हालांकि, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज का कहना है कि उनके आर्थिक कामकाज पारदर्शी हैं, जबकि कथित चोरी के बाद इस पर सवाल उठाए जा रहे हैं।