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राज्यसभा में पेपर लीक बिल पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस

गुरुवार को राज्यसभा में 'पेपर लीक विरोधी बिल' पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस हुई। मल्लिकार्जुन खड़गे ने शिक्षा नीतियों की आलोचना करते हुए मनुस्मृति का उल्लेख किया, जिससे सत्ताधारी पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। जेपी नड्डा ने खड़गे के आरोपों को खारिज करते हुए असंसदीय भाषा का उपयोग न करने की सलाह दी। खड़गे ने कहा कि केवल सजा बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि सिस्टम में सुधार की आवश्यकता है। इस बहस ने सदन में नारेबाजी और व्यवधान उत्पन्न किया।
 

राज्यसभा में बहस का आरंभ

गुरुवार को राज्यसभा में विपक्ष और सत्ताधारी दल के बीच एक गंभीर बहस हुई। यह चर्चा तब शुरू हुई जब विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने 'पेपर लीक विरोधी बिल' पर बात करते हुए मनुस्मृति का उल्लेख किया, जिस पर सत्ताधारी पक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा करते हुए, खड़गे ने बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा अब गरीबों की पहुंच से बाहर होती जा रही है और विश्वविद्यालयों में महत्वपूर्ण पदों पर RSS से जुड़े व्यक्तियों की नियुक्ति की जा रही है।


खड़गे के आरोप और सत्ताधारी पक्ष की प्रतिक्रिया

खड़गे ने यह भी कहा कि स्कूल और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में बदलाव किए जा रहे हैं और मनुस्मृति का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि यह शिक्षा में जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देती है। उनके इस बयान पर सत्ताधारी पक्ष ने तीखी आपत्ति जताई। इसके तुरंत बाद, एनडीए सांसदों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे सदन में नारेबाजी और व्यवधान उत्पन्न हुआ।


जेपी नड्डा की प्रतिक्रिया

सदन के नेता जेपी नड्डा ने खड़गे के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये बातें वास्तविकता से बहुत दूर हैं और इससे देश में गलत संदेश जा सकता है। उन्होंने खड़गे से आग्रह किया कि वे अपने बयान की पुष्टि करें। नड्डा ने कहा कि हम विपक्ष के नेता की बात को शांति से सुन रहे हैं, लेकिन उन्हें असंसदीय भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। उन्होंने खड़गे के हालिया बयान को असंसदीय बताते हुए उसे कार्यवाही से हटाने की मांग की।


बहस का अंत और खड़गे का तर्क

जब बहस तीव्र हुई, तो राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने हस्तक्षेप किया और कहा कि खड़गे की टिप्पणियां आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं होंगी। खड़गे ने तर्क दिया कि पेपर लीक रोकने के लिए केवल सजा बढ़ाने या फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इसके बजाय, सिस्टम में सुधार करके प्रश्न-पत्र लीक को रोकने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। खड़गे ने केंद्र सरकार पर शिक्षा का व्यवसायीकरण करने का आरोप भी लगाया और कहा कि गरीब छात्रों को समान अवसर मिलने में लगातार बाधाएं आ रही हैं।