राज्यसभा में औपनिवेशिक प्रतीकों की समीक्षा के लिए आयोग की मांग
राज्यसभा में औपनिवेशिक प्रतीकों की समीक्षा की आवश्यकता
नई दिल्ली, 5 अगस्त: बुधवार को राज्यसभा में भाजपा के एक सदस्य ने औपनिवेशिक प्रतीकों, स्मारकों और अप्रासंगिक कानूनों की गहन समीक्षा के लिए एक राष्ट्रीय आयोग के गठन की मांग की। भाजपा के दिनेश शर्मा ने विशेष उल्लेख के माध्यम से यह बात रखी। उन्होंने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी भारत औपनिवेशिक मानसिकता से पूरी तरह उबर नहीं पाया है।
शर्मा ने कहा, ‘‘दुनिया के कई देशों ने गुलामी के प्रतीकों को पहले ही समाप्त कर दिया है। पोलैंड और बाल्टिक देशों ने साम्यवादी और सोवियत प्रतीकों को सार्वजनिक स्थलों से हटा दिया है, जबकि चीन ने जापानी आक्रांताओं के सभी निशानों को मिटा दिया है और वहां के पाठ्यक्रम में जापान को आक्रांता के रूप में पढ़ाया जाता है।’’ उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली की प्रमुख सड़कों के नाम आज भी आक्रांताओं के नाम पर हैं, जैसे अकबर रोड, बाबर रोड, हुमायूं रोड, और तुगलक रोड।
उन्होंने यह भी कहा कि आजाद हिंद फौज के कई वीर सिपाहियों, रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह, अशफ़ाकउल्ला खान, बेगम हजरत महल, राणा प्रताप, और बिरसा मुंडा को भी उचित सम्मान मिलना चाहिए। शर्मा ने कहा, ‘‘हमारी न्याय प्रणाली में आज भी ‘माई लॉर्ड’ जैसी औपनिवेशिक शब्दावली का प्रयोग हमारी मानसिक दासता को दर्शाता है। इसलिए, मेरा सुझाव है कि सरकार एक राष्ट्रीय आयोग का गठन करे जो औपनिवेशिक प्रतीकों, स्मारकों और अप्रासंगिक कानूनों की गहन समीक्षा करे।’’
उन्होंने यह भी कहा कि पाठ्यक्रमों और संग्रहालयों में आक्रांताओं को आक्रांता के रूप में ही दर्शाया जाना चाहिए, न कि शासक के रूप में। साथ ही, आक्रांताओं के नाम के सभी स्मारकों को हटाने की आवश्यकता है।
विशेष उल्लेख के दौरान भाजपा के अशोक कुमार मित्तल ने विदेशों में भारतीयों पर बढ़ते नस्ली हमलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंजाब और अन्य क्षेत्रों से हर साल लाखों लोग सुनहरे भविष्य की तलाश में विदेश जाते हैं, लेकिन क्या भारतीय नागरिक वहां सुरक्षित हैं? मित्तल ने कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए एक प्रभावी कानून बनाने की मांग की। उन्होंने एक मजबूत वैधानिक ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसके तहत विदेशों में भारतीयों को जरूरत पड़ने पर त्वरित कानूनी और वित्तीय सहायता मिल सके।
भाजपा के सतपाल शर्मा ने जम्मू-कश्मीर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष केंद्रीय वित्तीय सहायता की मांग की। आम आदमी पार्टी (आप) के संत बलवीर सिंह, भाजपा के बाबूभाई जेसंगभाई देसाई, माया नारोलिया, मनोनीत सतनाम सिंह संधू और निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा ने भी विशेष उल्लेख के माध्यम से अपने मुद्दे उठाए।