राज्यसभा में उत्तराखंड की जनगणना और अधिवक्ताओं की सुरक्षा पर चर्चा
राज्यसभा में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा
शुक्रवार को राज्यसभा में सदस्यों ने उत्तराखंड में जनगणना, रांची के सीआईपी मानसिक चिकित्सालय के विस्तार, अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए कानून बनाने और संसदीय तथा विधानसभा चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण जैसे मुद्दों पर चर्चा की। सदस्यों ने सरकार से इन समस्याओं के शीघ्र समाधान की अपील की।
भाजपा के महेंद्र भट्ट ने जनगणना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह केवल एक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के भविष्य और पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने बताया कि 2027 की जनगणना देश की नीतियों और योजनाओं का आधार बनेगी, इसलिए इसे विशेष महत्व दिया जाना चाहिए।
भट्ट ने सुझाव दिया कि जनगणना को पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि ‘अपनी गणना अपना गांव’ जैसे जनभागीदारी अभियान के तहत संचालित किया जाना चाहिए। उन्होंने गांवों से पलायन के कारण कई गांवों के खाली होने का उल्लेख किया और कहा कि इसका जनांकिकी पर गहरा असर पड़ा है।
भाजपा के प्रदीप कुमार वर्मा ने रांची के सीआईपी मानसिक चिकित्सालय को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि 1918 में स्थापित इस संस्थान में दूर-दूर से मनोरोगी आते हैं, जिनमें से कई गरीब होते हैं। उन्होंने इसके विस्तार और नवीनीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया।
मनन कुमार मिश्रा ने अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए ‘अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम’ की मांग की, यह बताते हुए कि अदालतों में वकीलों की जान को खतरा होता है। उन्होंने कहा कि कई अधिवक्ताओं की हत्या भी हुई है, इसलिए सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।
रायगा कृष्णा ने संसदीय और विधानसभा चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की मांग की। उन्होंने कहा कि शिक्षा और नौकरी में ओबीसी के लिए आरक्षण है, लेकिन चुनावों में यह व्यवस्था नहीं है। उन्होंने सरकार से इस पर ध्यान देने की अपील की।