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राजूराम मीणा: बिना कोचिंग के आरएएस में सफलता की कहानी

राजूराम मीणा ने बिना कोचिंग के आरएएस 2024 में सफलता प्राप्त की है, जिससे उन्होंने अपने गांव और समाज का नाम रोशन किया है। एक साधारण परिवार से आने वाले राजूराम ने शिक्षा के लिए कठिन संघर्ष किया और वायुसेना में 20 साल सेवा देने के बाद प्रशासनिक सेवा में कदम रखा। उनकी कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। जानें कैसे उन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल किया और समाज में बदलाव लाने का प्रयास किया।
 

सफलता की प्रेरणा


सिरोही। यह कहा जाता है कि जब किसी के मन में कुछ करने की प्रबल इच्छा होती है, तो सफलता उसके कदम चूमती है। इसी बात को साबित करते हुए, बरवा की ढाणी के निवासी राजूराम मीणा ने बिना किसी कोचिंग और सुविधाओं के आरएएस 2024 में पहले प्रयास में सफलता प्राप्त की। उन्होंने प्रदेश में 2285 और एसटी एक्स सर्विसमैन में 05वीं रैंक हासिल कर अपने गांव और समाज का नाम रोशन किया। बरवा और घाणा के लोग बताते हैं कि राजूराम एक साधारण और गरीब परिवार से हैं, और आज भी बरवा गांव में अपने परिवार के साथ रहते हैं, जहां ना तो मूलभूत सुविधाएं हैं और ना ही शिक्षा का उचित माहौल। इसके बावजूद, उन्होंने आरएएस में चयनित होकर पूरे जनजाति समुदाय और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।


परिवार और समाज का समर्थन


राजूराम अपने सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और मार्गदर्शन देने वाले मित्रों को देते हैं। उनके निवास स्थान पर ग्रामीण और समाज के लोग माला और साफा पहनाकर उन्हें बधाई दे रहे हैं, जिससे परिवार में खुशी का माहौल है। राजूराम के घर में आज भी भेड़-बकरियों का पालन होता है, और परिवार के सदस्य इन्हें जंगल में चारागाह के लिए ले जाते हैं, जिससे उनका जीवन यापन होता है।


शिक्षा का संघर्ष

राजूराम की अधिकतर पढ़ाई सरकारी स्कूलों में हुई


राजूराम बताते हैं कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल में हुई और उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने ग्राम पंचायत मुख्यालय घाणा के सरकारी स्कूल में अध्ययन किया। उन्होंने बिना किसी संसाधन के रोजाना 8 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाने का कठिन संघर्ष किया। इसके बाद, उन्होंने कॉलेज स्तर की शिक्षा के लिए जालौर में दाखिला लिया, जहां वे जनजाति छात्रावास में रहकर पढ़ाई की और वायुसेना में शामिल हुए।


वायुसेना से प्रशासनिक सेवा तक


20 साल तक वायुसेना में दी सेवाएं, अब देंगे प्रशासनिक सेवाएं


राजूराम मीणा ने 20 वर्षों तक वायुसेना में विभिन्न स्थानों पर सेवाएं दीं। हाल ही में वे जून में सेवानिवृत्त हुए, लेकिन उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य बनाए रखा और किताबों से जुड़े रहे, जिसके परिणामस्वरूप वे आज सफल हुए हैं।


युवाओं के लिए प्रेरणा


राजूराम युवाओं के लिए बनें प्रेरणा स्त्रोत


राजूराम अनुसूचित जनजाति से जालौर जिले के पहले आरएएस अधिकारी बने हैं। अब तक इस जिले से कोई भी अनुसूचित जनजाति का व्यक्ति सीधे आरएएस नहीं बना था। राजूराम के चयन ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरे हैं।


समुदाय की प्रतिक्रिया

इनका कहना है


मैं और राजूराम पहले साथ पढ़ते थे। उस समय उनकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी, फिर भी वे रोजाना बरवा और घाणा तक पैदल जाते थे और पढ़ाई में भी अच्छे थे। राजूराम ने आरएएस में चयनित होकर पूरे गांव का नाम रोशन किया।


कानाराम मीना
प्रशासक, ग्राम पंचायत घाणा


इनका कहना है


राजूराम का आरएएस में चयन होना बरवा गांव के लिए गर्व की बात है। भविष्य में वे युवाओं के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन बनेंगे।


रामसिंह चम्पावत
पूर्व सरपंच, बरवा