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राजा रघुवंशी के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का निर्णय लिया

राजा रघुवंशी के परिवार ने अपने पति की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का निर्णय लिया है। मेघालय उच्च न्यायालय ने हाल ही में सोनम की जमानत को बरकरार रखा, जिसके बाद परिवार ने न्याय के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया। राजा के भाई विपिन ने कहा कि वे जल्द ही याचिका दायर करेंगे और इस मामले में अपनी आवाज उठाएंगे।
 

सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी

राजा रघुवंशी के परिवार ने पिछले साल हनीमून के दौरान हुई हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय लिया है। वे मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी की ज़मानत रद्द करने की मांग करेंगे। सोनम, जो मध्य प्रदेश के इंदौर की निवासी हैं, को पिछले साल जून में अपने बिज़नेसमैन पति की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हाल ही में, मेघालय उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें निचली अदालत द्वारा 27 अप्रैल को दी गई ज़मानत को रद्द करने की मांग की गई थी।


राजा के भाई का बयान

सुप्रीम कोर्ट में अपील की योजना

राजा के बड़े भाई विपिन रघुवंशी ने इंदौर में कहा, "हम सोनम की ज़मानत रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे और जल्द ही याचिका दायर करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे।" उन्होंने अभियोजन पक्ष की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उनका परिवार न्याय के लिए कानूनी लड़ाई खुद लड़ेगा और एक निजी वकील नियुक्त करेगा। विपिन ने यह भी कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि मेघालय पुलिस ने सोनम की गिरफ्तारी के समय कानूनी आधार के बारे में जानकारी क्यों नहीं दी।


मेघालय उच्च न्यायालय का निर्णय

सोनम की जमानत बरकरार

सोमवार को मेघालय उच्च न्यायालय ने सोनम रघुवंशी को दी गई जमानत के निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा। उन पर 2025 में पूर्वोत्तर राज्य में हनीमून के दौरान अपने पति की हत्या का आरोप है। न्यायमूर्ति डब्ल्यू डिएंगडोह की एकल-न्यायाधीश पीठ ने राज्य सरकार द्वारा दायर आपराधिक याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यदि गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी इस प्रकार दी जाती है, तो यह गिरफ्तारी करने वाली एजेंसी द्वारा विवेकपूर्ण निर्णय न लेने को दर्शाता है। इससे न्यायालय ने यह निष्कर्ष निकाला कि गिरफ्तार व्यक्ति के पास यह तर्क देने का मजबूत आधार है कि उसे गिरफ्तारी के प्रारंभिक चरण में प्रभावी कारणों की सूचना नहीं दी गई थी। इसलिए, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 22(1) को धारा 47(1) के साथ पढ़ा जाए तो यह लागू होता है।